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रविवार, 23 अगस्त 2015

एक सवाल















एक सवाल 
**
सवाल यह नहीं है
कि हम अपनों के लिए 
क्यूँ करते है
कर्म-कुकर्म 
पुण्य-पाप..?

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सवाल तो यह भी नहीं है 
कि हम अपनों के लिए 
जीते क्यूँ है..?

**
सवाल तो यह है 
कि हमारा अपना है कौन....?

रविवार, 10 मार्च 2013

अधजली लड़की


कल महाशिवरात्री के दिन ही सृष्टी की रचना करने वाली एक बेटी ने इहलीला समाप्त कर ली। वह भी एक सैतेली मां की प्रताड़ना से आजीज होकर। या मामला प्रेम प्रसंग का भी हो सकता है, छानबीन कर रहा हूं। इससे पूर्व वह अपनी शिकायत लेकर थाना गई थी पर वहां से उसे भगा दिया गया।
शेखपुरा जिले के बरबीघा रेफरल अस्पताल के बेड पर वह कराह रही थी और मेरे आंखों से आंसू बह चले। अविरल। अस्पताल कर्मी अर्जुन लाल की बीस वर्षिय पुत्री नैना ने अभी जिंदगी की दहलीज पर कदम ही रखा था ओह...
(आंसू के साथ साथ ये शब्द भी छलक पड़े...)

कैसे निर्वस्त्र पड़ी थी
वह अधजली लड़की
कराहती हुई
रोकने की कोशीश
बेकार कर 
बह चला आंखों का समुंद्र
ओह
आखिर कब तक
जलती रहेगी 
बेटियां?

हे ईश्वर
तुम भी मुझे 
अपनी ही तरह
पत्थर का बना क्यूं नहीं देते....

शनिवार, 6 अक्टूबर 2012

बेजुबां बच्चे...और उनकी कविता



इस सरकारी भवन के दरवाजे पर खड़ा होते ही अति-उत्साह के साथ आकर एक बच्चे ने ताला खोला और झट से हाथ मिलाया। पर यह क्या? वह ईशारे से चलने के लिए कह रहा था। ओह! यह बच्चा मूक-बधिर है। उसके साथ ही कई मूक बधिर बच्चे एक कमरे में बैठ कर पढ़ रहे थे। यह शिक्षा विभाग का कार्यालय था। बभनबीघा गांव में स्थित इस बीआरसी भवन में इसी तरह के बच्चों को पढ़ना, लिखना और समझने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है।
यहां अति उत्साहित बच्चों ने ईशारों को समझ अपना नाम, पता सब कुछ कॉपी पर लिखने लगा। वहीं प्रशिक्षक श्रणव ने बताया कि इनकी सीखने की क्षमता बहुत प्रबल होती है और यहां अभी डेढ़ माह के लिए 35 बच्चे आवासीय रहकर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे है।
बिहार शिक्षा परियोजना के तहत चल रहे इस कैंप में उन बच्चों का भविष्य संबर रहा है जिन्हें यदि यहां यह प्रशिक्षण नहीं मिलता तो जीवन की इस रेस में रेंगते नजर आते...



इन बेजुबां बच्चों को कविता के माध्यम से मैंने शब्द दी है...

जीवन तो दिया मुझे भी
पर नहीं दिया सुनने
और बोलने का हक।
यानि कि
नहीं दिया जीने का अधिकार,
फिर भी मैं तुमसे नाराज कहां हूं!
जीवन दिया ,
तो जीना ही होगा।
और जीना है,
तो जीतना ही होगा....
शायद इसी जीत में
तुम अपनी जीत देखेगो
मेरे भगवान...