मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

बंदरी का वेलेंटाइन विश


(अरुण साथी)

आंय जी,
प्रेम विवाह के
दो दशक हुए आपने मुझे
कभी वेलेंटाइन विश नहीं किया..!

मैंने कहा, बंदरी
आजकल के लौंडे
कई को विश करते है।

एक को कॉल तो
दूसरी को मिस करते है।

तीसरी से व्हाट्सअप
तो चौथी से फेसबुक पे
चैटिंग है,
नए दौर के मजनुओं का
दर्जनों से सेटिंग है..

मेरे जैसा प्रेम करके
पत्नीव्रता होना
बकलोली है,

इसी लिए तो आपकी
इतनी बढ़ी हुई बोली है!

प्रेम प्रदर्शन नहीं
आत्माओं का मिलन है।

प्रेम ईश्वर का
प्रसाद है।

प्रेम समर्पण
और त्याग है।

बस क्या
बंदरी ने किस किया,
मुझको भी वेलेंटाइन विश किया..!





मंगलवार, 31 जनवरी 2017

वजूद

वजूद
**
तेज ताप से
खौल उठता है
वजूद...

और उधियाने
लगता है

तभी कोई अपना
पानी का छींटा देकर
संभल लेता है..
उधियाते वजूद को..

(तस्वीर को कैद करते हुए दो शब्द गढ़ दिए..)
@अरुण साथी

रविवार, 29 जनवरी 2017

मौत से पहले..

मौत से पहले...

बहुत भचर-भचर करते हो
मार दिए जाओगे
एक दिन
उन्हीं लोगों की तरह..

लगी होगी एक-आध गोली
पीठ में, सीने में
या कनपट्टी के आसपास कहीं..

बीच सड़क पे
बिखर जायेगा तुम्हारी रगो
का खौलता हुआ खून
और लहू का लाल रंग
काली तारकोल से मिलकर
गडमड रंग का हो जायेगा...

हाँ, कुछ लोग आएंगे
सहानुभूति जताएंगे
पर कुछ लोग वहीं
लाश के सिरहाने ही
गाली भी देंगे
कुछ बुरा,
कुछ भला कहेंगे..

क्यों और किसके लिए
यह सब करते हो...

उपरोक्त आत्मीय
वचनों के बीच के
अंतर्मन में
नाद गूँज उठा

"मौत से पहले कौन मरा है?"
"मौत आने पर कौन बचा है..?"




शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

साथी के बकलोल वचन

"अहिंसा परमो धर्मः"
कहने वाले गाँधी की
तस्वीर खादी से मिटा दी....

हंगामा क्यों है बरपा
जो उन्होंने अपनी
फितरत बता दी.….

#साथी के #बकलोल_वचन

शनिवार, 31 दिसंबर 2016

महुआ महके..

महुआ महके तोर अंगना में,
सूरजमुखी खिल जाये।
बेला, जूही, हरसिंगार सन,
जीवन खुशबु  से भर जाये।।

सरसों फूलो, मांजर महके,
धान, गेहुम लहराये।
केतारी सन रसगर हो जीवन,
मटर, मकई नियर गदराये।।

कोयल कूके, बुलबुल गाये,
तोता, मैना शोर मचाये।
आये गोरैया, पानी पिए,
अंगना में, धप्चुहिया मुस्काये।।

चुमनुमिया चिरैया शोर मचाये,
कागा आके भोर जगाये।
खिले गुलाब, गेंदा गोदी में,
कहे "साथी" बथान में गोरु-गाय डोंराय।।

*नव बर्ष की मंगलकामनाएं..*
अरुण साथी, पत्रकार, बरबीघा, (बिहार)

सोमवार, 26 दिसंबर 2016

आम आदमी

भागमभाग
उठापटक
कभी उधर
कभी इधर
सपने-हकीकत
घर-परिवार
दोस्ती-यारी
देश-समाज
दाल-रोटी
की जद है जिंदगी..
**
घिसे चप्पल
सिले जूते
चिप्पी पैंट
फटे जेब
फटी चादर
और लंबे पैर
की हद है जिंदगी..
**
एक चुटकी ईमानदारी
मुठ्ठी भर बेईमानी
मन भर आत्मा
छटाँक भर परमात्मा
बड़े बड़े बोल
कर्म, कुकर्म
बस यही सब
कशमकश है ज़िन्दगी...
***
सुबह सूरज उगे
कि फूल खिले
पंछी के गीत हो
कि शाम ढले
नया साल आये
कि पुराना साल जाये
आम आदमी के लिए
तो बस
जद्दोजहद है जिंदगी..
(27-12-16)

बुधवार, 30 नवंबर 2016

विरहन..

जब भी वह मिलती है
हौले से मुस्कुरा,
आहिस्ते से मचलती है!

वैसे ही जैसे,
सूरज की लाली से
सूर्यमुखी खिलती है!


वैसे ही जैसे,
भौरे की गुनगुन से
कली की पंखुड़ी खुलती है!

वैसे ही जैसे,
चाँद की चांदनी से
चकोर मचलती है!

वैसे ही जैसे,
मोर नृत्य से
मोरनी पिघलती है!

वैसे ही जैसे,
प्रेमपुलक
गजगामिनी निकलती है!

वैसे ही जैसे,
प्यासी धरा से
मेघ मिलती है!

वैसे ही जैसे
धूप के ताप से
बर्फ पिघलती है!

और 
वैसे ही जैसे,
सूर्य मिलन को
फीनिक्स पंक्षी 
की अभीप्सा जलती है..

मंगलवार, 1 नवंबर 2016

झूठ की खेती

झूठ की खेती
(अरुण साथी)

वह बंजर जमीन हो
या कि हो
मरूभूमि
या हो
पठार-पर्वत

कुछ लोग
बड़े कुशल उद्यमी
होते है

और वे बंजर जमीन पे भी
झूठ की फसल बोते है

लच्छेदार बातों से
उसे सींचते
कोड़ते और निकोते है

सच कहता हूँ
कुछ लोग
झूठ की खेती करने में
बड़े मास्टर होते है..

गुरुवार, 29 सितंबर 2016

परिवार

परिवार
**
माँ-बाबु जी का
गलतियों पे डाँटना,
उदासी का कारण पूछ
दुःख बाँटना है।
अच्छा लगता है..

2
दोपहर को खाने का
मिसकॉल आना,
देर रात  घर पहुँचने पे
बीबी का रूठ जाना।
अच्छा लगता है..

3
बिना वजह आप किसी से
भी क्यों उलझते है,
दुनिया की छोड़ अपनी
फ़िक्र करो; भाई का समझाना।
अच्छा लगता है...

4
बेटा का खिलौने
की जिद्द नहीं पकड़ना
टूटे जूते को देख टोकने पर,
अभी चलेगा पापा कहना।
अच्छा लगता है..

5
मुंहझौंसी, जरलाही कहके
बीबी को चिढाना,
मायके की शिकायत पे
उसका मुंह फूलना।
अच्छा लगता है..

6
बेटी की सहनशक्ति
गाहे-बेगाहे सामने आना,
अभावों को छुपा कर
उसका मुस्कुराना।।
अच्छा लगता है...

मंगलवार, 27 सितंबर 2016

दासी लोकतंत्र

दासी लोकतंत्र
**
साथी उवाच

"क्यों
जनतंत्र में
मालिक जनता
भूखी और प्यासी है?

राजा के घर क्रंदन
क्यों है?

क्यों मुख पे
छाई उदासी है?"

**
बकलोल उवाच

"क्योंकि
लोकतंत्र तो
वंशवादी,
जातिवादी,
धर्मवादी,
नेताओं के
चरणों की दासी है।।।
(शपथ ग्रहण के बाद उत्तरप्रदेश के मुखिया मुलायम सिंह के पैरों में लटके मंत्री गायत्री प्रजापति प्रसंग पे)

शनिवार, 17 सितंबर 2016

भूख और माँ

भूख और माँ

(सोशल मीडिया पे वायरल इस तस्वीर को देखकर साथी के शब्द.. निःशब्द..)
**
जिंदगी है
मौत है
और है
मौत से भी
भयावह
क्रूर
बर्बर
भूख..

इसीलिए तो
भूख और माँ
की लड़ाई में
भूख जीत जाता है
माँ हार जाती है..
अक्सर..

बुधवार, 14 सितंबर 2016

भक्त

"भक्त"
**
"अच्छे दिन"
और
"काला धन"
को जुमला
कहे जाने पर भी
जो आसक्त रहते है,

हे तात
कली काल में
उसे ही
भक्त कहते है..
----
#साथी के #बकलोल वचन



रविवार, 11 सितंबर 2016

प्रहसन

यह एक प्रहसन है
लोकतंत्र का प्रहसन
यहाँ
लिखी गयी पटकथा पे
अभिनय करते है
लोग

तभी तो
वही लोग
जो कल तक
रावण को मानते थे
राक्षस,
आज अचानक
भगवान् मानने लगे..!

वही लोग
जिनके लिए पाप था
सीता का
अपहरण
द्रोपदी का
चीरहरण
लाक्षागृह दहन
दुर्योधन का
अत्याचार,
आज इसे ईश्वर की
इच्छा मानने लगे..

वही कृष्ण
जाने कैसे
कुरुक्षेत्र में
आकर
कहने लगे

"हे तात
लाभ-हानि
जीवन-मरण
यश-अपयश
सब कुछ विधि हाथ..

गुरुवार, 8 सितंबर 2016

तूती की आवाज



कातिल को कातिल कहो, रवायत नहीं है।

फ़क़त मुर्दों से ज़माने को शिकायत नहीं है!!

मुर्दों के शहर में रहकर भी शोर क्यों करते हो,
यह कब्र में सोये हुए बंदों से अदावत नहीं है?


बस्ती है यह चोरों का, जयकारा उसका होगा,
सच कहना क्या इस दौर में कयामत नहीं है?


जब नक्कारखाने में मुनादी है खामोश रहने की,
वैसे में तेरा शोर, "तूती" बनने की कवायद नहीं है?

बुधवार, 3 अगस्त 2016

धुंधले रिश्ते

जिंदगी अब कहाँ किसी
सिरहाने टिकती है।
हर एक रिश्तों की अब
धुंधली सी तस्वीर दिखती है।।

◆कोई होकर भी अपना,
कभी अपना न हुआ।
किसी की जिंदगी गैरों
की खातिर ही बिकती है।।

◆जाने क्या रिश्ता है
अपना उनसे।
वो पगली मुझे देख कर
बेवजह हंसती है।।

◆देखा है अलग अलग
चेहरे रिश्तों के यहाँ,
सुना है रिश्ते भी अब
ब्यूटी पार्लरों में सजती है।।



शनिवार, 23 जुलाई 2016

आईये यूँ नागपंचमी मनाते है..

आईये यूँ 
नागपंचमी मनाते है..
*अरुण साथी*
कुछ तथाकथित 
दोस्तों को
आदर सहित 
घर बुलाते है
और उनको
भरपेट दूध पिलाते है..
**
आईये यूँ 
नागपंचमी मनाते है..
**
कुछ तथाकथित 
सेकुलरों के घर जाते है
और उनको दूध पिलाकर
आस्तीन का सांप 
होने का अर्थ समझाते है..
**
आईये यूँ
नागपंचमी मनाते है...
**
कुछ तथाकथित राष्ट्रवादी
भक्तों को दूध सुँघाते है
उनको उकसाते है
और फिर
उनकी जिह्वा से निकली
गलीज गालियों के बीच
कालिया नाग और 
उनके बीच की समानता का
अर्थ उन्हें समझाते है...
**
आईये यूँ 
नागपंचमी मनाते है..
**
कुछ तथाकथित 
मुल्लों-मौलवियों
पण्डे-पुरोहितों
जकीरों-ओवैसियों
साध्वियों-योगियों
को धर लाते है
उनके बिष के 
दाँत तोड़कर
उन्हें देशभक्ति का
पाठ पढ़ाते है..
**
आईये यूँ,
नागपंचमी मनाते है...

मंगलवार, 12 जुलाई 2016

छिछियैनी दुर्गन्ध

छिछियैनी दुर्गन्ध 

(अरुण साथी)


बोन चाइना की

कशीदाकारी प्लेट में

जब गोश्त का टुकड़ा डाला

तो अजीब सी छिछियैनी

दुर्गन्ध आई...


पांच सितारा भव्यता

लेज़र लाइटिंग की चकाचौंध

ह्रदय गति को

स्तंभित करती

डीजे की धूम-धड़ाक में भी

यह छिछियैनी सी दुर्गन्ध

जानी पहचानी सी लगी..


ओह,

यह तो वही छिछियैनी सी दुर्गन्ध है

जो आज ही अस्पताल में पड़ी

दहेज़ के लिए जली 

एक बेटी की

देह से आ रही थी..


ओह, ओह, ओह

बुधवार, 15 जून 2016

अभी हारा नहीं हूँ मैं...

नहीं
अभी हारा नहीं हूँ मैं..
गिरा भर हूँ
मुँह के बल ही सही
गिर जाना
हारना नहीं होता..

फिर उठ कर चलूँगा
एक एक कदम ही सही
मंजिल की ओर
जीतने के लिए

और
जबतक
जीतने का जुनून बाकि है
हारा हुआ मत समझना मुझे
सुना की नहीं
सुन तो लो सही
हारा हुआ मत समझना..

गुरुवार, 26 मई 2016

साथी के बकलोल वचन

साथी के बकलोल वचन
😶😶😶
बिहार में आईलो ई कइसन विहान,
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान !

कहिनो मर्डर, कहिनो किडनैप,
कहिनो रंगदारी त कहिनो हुड़दंग।
कजै नै हे सुरक्षा, घर कि दालान,
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान !

कहिनो मरे पत्रकार अ कहिनो व्यपारी,
गुंडागर्दी करे हे अदमी सरकारी।
एमएलए करे रेप औ चले सीना तान।
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान!

आम अदमी के त जहाँ तहाँ बम से उड़ाबे हे,
पुरनका सीएम के गाड़ियों जराबे हे।
कैसु बेचारा मांझी बचैलका अपन जान।
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान!⁠⁠⁠⁠

साथी के बकलोल वचन

साथी के बकलोल वचन
😶😶😶
बिहार में आईलो ई कइसन विहान,
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान !

कहिनो मर्डर, कहिनो किडनैप,
कहिनो रंगदारी त कहिनो हुड़दंग।
कजै नै हे सुरक्षा, घर कि दालान,
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान !

कहिनो मरे पत्रकार अ कहिनो व्यपारी,
गुंडागर्दी करे हे अदमी सरकारी।
एमएलए करे रेप औ चले सीना तान।
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान!

आम अदमी के त जहाँ तहाँ बम से उड़ाबे हे,
पुरनका सीएम के गाड़ियों जराबे हे।
कैसु बेचारा मांझी बचैलका अपन जान।
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान!⁠⁠⁠⁠

बुधवार, 30 मार्च 2016

मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ, हाँ मैं भूख से नहीं मरा..

मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ, हाँ मैं भूख से नहीं मरा..

(अरुण साथी)

हाँ मैं जागो मांझी ही बोल रहा हूँ
गलत है कि मैं मर गया हूँ
मैं मर कैसे सकता हूँ
मैं तो बोल ही रहा हूँ
कि मैं भूखा हूँ
मुझे रोटी दो
पर सुनेगा कौन?
इस कब्रिस्तान में?

समूचा शहर ये कब्रिस्तान है
जिसमे रहते है साँस लेते
चलते, बोलते लोग

और इसी कब्रिस्तान का राजा
को मेरे भूखे होने की आवाज
नागवार लगी है
इसी लिए उन्होंने
मेरे शारीर को
चिड़फाड़ कर
यह साबित किया
कि मैं भूखा नहीं हूँ

हे महाराज
मैं अकेला नहीं
बोल रहा हूँ
लाखों है बोलने वाले
कि मुझको ही मेरे हिस्से का
राशन नहीं मिलता,

हे महाराज
मेरे जैसों की क्रंदन को
सुनो तो,

और सुनो तो
कि मरने के बाद भी
जागो मांझी क्या बोल रहा है..

हाँ मैं भूख से नहीं मरा,
मैं तो मरा हूँ
इस व्यवस्था कि
अकर्मण्यता से
निर्लज्जता से
संवेदनहीनता से

मैं तो मरा हूँ
छीन लिए गए
मेरे हिस्से के
उन
निवाले कि वजह से
जो
नोटों की शक्ल में
तुम्हरी तिजोरी में बंद है

सुनो तो सही
मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ...

(भूख से मरे जागो मांझी की खबर करने के बाद)

सोमवार, 21 मार्च 2016

उल्टी करता आदमी.

उल्टी करता आदमी..

पता नहीं क्यों
दूसरों की वनिस्पत
कुछ आदमी में बड़ी कमी होती?

दूसरे
हजम कर जाते है
बहुत कुछ
कई तो सबकुछ
जैसे वो
आदमी नहीं
तिलचट्टा हो
सर्वाहारी...

कुछ
उल्टी कर देते हैं
हज़म नहीं कर सकते
सबकुछ
जैसे कि
सामाजिक बिसंगति
धार्मिक थोथापन
जातिय उन्माद

और कर देते है उल्टी
कहीं किसी समाज में
कहीं किसी देश में
कहीं किसी सोशल मीडिया में...
सच है
उल्टी करने वालों को भला
कौन पसंद करेगा
फिर भी
कुछ लोग है उल्टी
करनेवाले
तभी बची है दुनिया..

शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

रोज डे पे साथी के बकलोल वचन

रोज डे पे साथी के बकलोल वचन
(अरुण साथी)
🌹🌹🌹
रोज डे पे श्रीमती जी को
जब गुलाब दिया
तो उसके चेहरे पे
प्रेम का भाव नहीं पाया,
मैं अत्यधिक घबराया,
मन में संशय आया,
कहीं किसी ने
मुझसे पहले तो
गुलाब नहीं थमाया!
🌹🌹🌹
पूछा,
"प्रिय, अपनी शादी के
सिल्वर जुबली बर्ष पे भी
मैंने तुम्हें ही गुलाब थमाया,
फिर तुमने
मेरे रगो के खौलते लहू में
अपनी शीतलता का
भाव क्यों मिलाया?"
😡😡😡
श्रीमती जी और भड़क गयी,
"कलमुहें,
क्या मैं तुम्हें
जानती नहीं?

जरूर यह गुलाब किसी
कलमुंही के लिए ख़रीदा होगा,
मेरे लिए तो आज तक
एक बिंदी भी नहीं लाया....!

जानता नहीं कि
बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता।

तुम गधे मर्द तो
सुहागरात के अंधे होते हो,
तुम्हें हमेशा दूसरी
तरफ की सूखी घांस भी
हरी हरी
नजर है आती है,
दूसरी वाली जरलाही भी
मन को भाती है,
अपनी बीबी तो
हर बात पे काट खाती है..।

मैं तो अवाक रह
सोचने लगा,
बीबी और मोदी जी में
कितनी समानता है,
एक "मन की बात" करते है,
एक "मन की बात" पकड़ती है..।
मोदी भी अकड़ते है,
बीबी भी अकड़ती है...।।।

शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

पहली सी मोहब्बत नहीं रही....



























उनको अब मुझसे शिकायत नहीं है,
शायद अब पहली सी मोहब्बत नहीं रही।

दुश्मनों से भी हंस-बोल लिया करते थे,
शायद अब पहली सी अदावत नहीं रही।

इन्कारे-ए-मोहब्बत पर तेजाब फेंक देते हैं,
शायद अब पहली सी इश्के-रवायत नहीं रही।







रविवार, 31 जनवरी 2016

ब्रह्मपुत्र













स्वर्ण देश का
प्रजापालक था वह..


स्वर्ग में सीढ़ी लगाने,
समुन्द्र जल मीठा करने का
राष्ट्रवादी स्वप्नद्रष्टा था वह..


वह प्रकांड ब्राह्मण
और ब्रह्मपुत्र था...


वह भक्त था,
महाभक्त,
महाकाल का..


सर्वगुण सम्पन्न था वह..

बस,
वह अहंकारी था
और
रावण कहलाया..!