गुरुवार, 28 अक्तूबर 2010

सपना और सपनों का सच

सपना और
सपनों का सच


सपनों के लिए है जरूरी
नीन्द का होना
निबाZेध और
निर्जीव सा होना
सपनों के लिए है जरूरी
आदमी को चैन से सोना...

सपना
सच है अन्त:करण का
सपना सच है
जीवन और मरन का.....

सपनों से आगे भागो तुम
सपनों से सो कर जागो तुम


सपना है अन्त: का विस्फोट
सपना है अन्त: का आक्रोश
सपना है अन्त: का स्नेह
सपना है  अन्त: का क्लेश

सपना भले ही सपना है
सपना ही शास्वत अपना है.......

6 टिप्‍पणियां:

  1. सपना भले ही सपना है
    सपना ही शास्वत अपना है
    बिलकुल सही कहा। मगर कई बार सपने ही आदमी को कहीं का कहीं पहुँचा देते हैं। अच्छी रचना। धन्यवाद।

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  2. सपना है अन्त: का विस्फोट
    सपना है अन्त: का आक्रोश
    सपना है अन्त: का स्नेह
    सपना है अन्त: का क्लेश

    सपना भले ही सपना है
    सपना ही शास्वत अपना है.......
    bahut sundar varnan... par insaan taumra apne sapno ke peechhe hi to bhagta hai, unhe poora karne kee chah to har kisi ke andar hoti hai...

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  3. why u use naked panting female, kabhi male ki bhi tasvir naked wali lagaye to kahe ?

    from male 27,

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  4. सपनों के लिये ज़रूरी है , आदमी का चैन से सोना।

    सपनों को बिम्ब बनाकर ज़िन्दगी की सुन्दर फ़िलासफ़ी बयां करने के लिये बधाई।

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