सोमवार, 26 जून 2023

आसन नहीं है पिता होना

आसन नहीं है पिता होना

कहां आसान है
किसी के लिए
पिता होना
और
आसान कहां है 
पिता के लिए
कुछ भी,
यहां तक की रोना भी

कहां रो पाता है पिता
दर्द में, खुल कर  अक्सर
कभी कभी जब  टूटता है अंदर से
तो रोता है अंदर ही अंदर

और फिर हंसना तो 
जैसे पिता के लिए
और भी आसान नहीं

मुश्किलों से लड़ते लड़ते
खुलकर हंसे तो
पिता के लिए
युग हो जाता है

कभी कभी हंस लेता है
पिता, 
कठ्ठ हंसी
जैसे कुछ छुपा रखा  हो 
अपने अंदर


अब कहां आसान है
मुश्किलों से लड़ते
पिता के लिए
सांस तक भी लेना...

4 टिप्‍पणियां:

  1. हर रिश्ते की कोई ना कोई सीमा है| आसान भी है और कठिन भी |

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों के आनन्द में" बुधवार 28 जून 2023 को लिंक की जाएगी .... http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं