साथी
arun sathi ki kavita
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
arun sathi ki kavita
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
मंगलवार, 13 जनवरी 2026
अब कहीं आदमी नहीं मरता
अब कहीं आदमी नहीं मरता (अरुण साथी) खंड-खंड होकर पहले हमारी संवेदनाएं मेरी तब उसके बाद अब कहीं कोई आदमी नहीं मरता..
अब, कहीं कोई हिंदू मरता है कहीं कोई मुसलमान मरता है और मरते हैं यहूदी, सिख, ईसाई और बौद्ध बस अब कहीं कोई आदमी नहीं मरता.
पुराने पोस्ट
मुख्यपृष्ठ
मोबाइल वर्शन देखें
सदस्यता लें
संदेश (Atom)