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शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2014
धुंआ उठता है..
आंसू मेरे बहे
भींगे उनके नयन
दर्द मुझकों मिला
सजी उनकी गजल
न चिंगारी उठी
न आग लगी
फिर भी
जलन है
तपन है
और धुंआ भी उठता है
देखिए
बड़ी नफाशत से
साथी के जिंदगी का
शहर जलता है......
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