अफ़ीम
**
भूख
गरीबी
बेरोजगारी
अशिक्षा
से बिलखते
माँ भारती के बच्चों को
वे बड़ी आसानी से सुला देते है,
**
ये राजनेता
जागने से पहले ही
बच्चों को फिर से
धर्म की अफ़ीम चटा देते है..
@arunsathi
बुधवार, 19 अप्रैल 2017
अफ़ीम
शनिवार, 15 अप्रैल 2017
साथी के बकलोल वचन
दहेज प्रथा
बाल विवाह
जात-पात
खतम करे के
नीतीश जी
के जगलो हें चाह,
मने की,
पोलटिक्स छोड़
साहेब पकड़ता अब
सन्यास आश्रम के राह..
#साथी के #बकलोल_वचन
शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017
शगल
जिंदगी का अजीब फ़लसफ़ा है,
हर एक आदमी दूसरे से खफा है!
गैरों के गुनाहों का बही-खाता है सबके पास,
बस अपने गुनाहों का हिसाब रफा-दफा है!
तौहीन करने का शगल ऐसा है उनका,
खुद ही तोहमत लगा लेते कई दफा है!
किसपे करूं यकीन कहो तो "साथी",
करो भरोसा जिसपे मिलती जफ़ा है!!
गुरुवार, 13 अप्रैल 2017
बिना पेंदी का लोटा
जबसे कजरी
बिना पेंदी का लोटा हुआ,
तब से एक एक
वोट का टोटा हुआ..
2
उम्मीद टूटने बालों
का लगा है श्राप,
जमानत जप्ती का
रिकॉर्ड बना रही "आप"..
#साथी के #बकलोल_वचन
परजीवी
परजीवी
****
यार-दोस्त
भाई-बंधु
समान होता है,
और साथ रहकर
आदमी खून चूस
खोखला कर देता है..
साथी के बकलोल वचन
🙈🙊🙉
सोमवार, 10 अप्रैल 2017
मंगलवार, 4 अप्रैल 2017
हे राम
हे राम
अपने जीवन में
राम के आदर्शों को
रत्ती भर भी
नहीं उतार रहे हैं,
वैसे लोग भी
चौक-चौराहे पर
जय श्रीराम
चिंघाड़ रहे हैं ...
कैसा कलिकाल
आया अब तो
रावण के वंशज ही
धर्म ध्वजा लेकर
राम को मार रहे हैं...
सोमवार, 27 मार्च 2017
नया खुदा चुन लें..
दुनिया की आबोहवा में जहर बहुत है,
चलो अब मुठ्ठी भर ताजी हवा चुन लें!!
मजहब तो नफ़रत बांटता है आजकल,
चलो अब कोई नया खुदा चुन लें!!
काम जिनका है कातिलों का "साथी",
चलो अब रास्ता उनसे जुदा चुन लें!!
रविवार, 26 मार्च 2017
जख्मों का हिसाब मत रख..
जिंदगी में जख्मों का हिसाब मत रख।
गम के पन्ने हो, वैसी किताब मत रख।।
बच्चों की तरह जीता चल जिंदगी।
चेहरे पे कोई भी नकाब मत रख।।
जिससे है शिकवा तो बता दे उसको।
दिल में छुपा के आफताब मत रख।।
शुक्रवार, 10 मार्च 2017
यूपी के बौराल होली
यूपी के बौराल होली
(अरुण साथी)
यूपी वाला पे फगुआ के
चढ़लो ऐसन उमंग,
दबा दबा के ईवीएम के
कैलक खूब हुड़दंग
जोगीरा सारा रा रा...
मोदी जी भी पी
लेलका जैसे भंग,
बोल-कुबोल से छोड़ा
देलका यूपी के जंग
जोगीरा सारा रा रा...
सोंच रहल हे बबुआ
बाबू-चाचा से कैलक काहे जंग
चिंता में डूबल डिम्पल भौजी
केकरा डाले रंग
जोगीरा सारा रा रा...
रो रहल हे राहुल बाबा
मम्मी जी के संग
बहिन जी के ब्लड प्रेशर बढ़ गेल
केजरी कहलक "जनता है मन-मतंग"
जोगीरा सारा रा रा...
मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017
बंदरी का वेलेंटाइन विश
(अरुण साथी)
आंय जी,
प्रेम विवाह के
दो दशक हुए आपने मुझे
कभी वेलेंटाइन विश नहीं किया..!
मैंने कहा, बंदरी
आजकल के लौंडे
कई को विश करते है।
एक को कॉल तो
दूसरी को मिस करते है।
तीसरी से व्हाट्सअप
तो चौथी से फेसबुक पे
चैटिंग है,
नए दौर के मजनुओं का
दर्जनों से सेटिंग है..
मेरे जैसा प्रेम करके
पत्नीव्रता होना
बकलोली है,
इसी लिए तो आपकी
इतनी बढ़ी हुई बोली है!
प्रेम प्रदर्शन नहीं
आत्माओं का मिलन है।
प्रेम ईश्वर का
प्रसाद है।
प्रेम समर्पण
और त्याग है।
बस क्या
बंदरी ने किस किया,
मुझको भी वेलेंटाइन विश किया..!
मंगलवार, 31 जनवरी 2017
वजूद
वजूद
**
तेज ताप से
खौल उठता है
वजूद...
और उधियाने
लगता है
तभी कोई अपना
पानी का छींटा देकर
संभल लेता है..
उधियाते वजूद को..
(तस्वीर को कैद करते हुए दो शब्द गढ़ दिए..)
@अरुण साथी
रविवार, 29 जनवरी 2017
मौत से पहले..
मौत से पहले...
बहुत भचर-भचर करते हो
मार दिए जाओगे
एक दिन
उन्हीं लोगों की तरह..
लगी होगी एक-आध गोली
पीठ में, सीने में
या कनपट्टी के आसपास कहीं..
बीच सड़क पे
बिखर जायेगा तुम्हारी रगो
का खौलता हुआ खून
और लहू का लाल रंग
काली तारकोल से मिलकर
गडमड रंग का हो जायेगा...
हाँ, कुछ लोग आएंगे
सहानुभूति जताएंगे
पर कुछ लोग वहीं
लाश के सिरहाने ही
गाली भी देंगे
कुछ बुरा,
कुछ भला कहेंगे..
क्यों और किसके लिए
यह सब करते हो...
उपरोक्त आत्मीय
वचनों के बीच के
अंतर्मन में
नाद गूँज उठा
"मौत से पहले कौन मरा है?"
"मौत आने पर कौन बचा है..?"
शुक्रवार, 13 जनवरी 2017
साथी के बकलोल वचन
"अहिंसा परमो धर्मः"
कहने वाले गाँधी की
तस्वीर खादी से मिटा दी....
हंगामा क्यों है बरपा
जो उन्होंने अपनी
फितरत बता दी.….
#साथी के #बकलोल_वचन
शनिवार, 31 दिसंबर 2016
महुआ महके..
महुआ महके तोर अंगना में,
सूरजमुखी खिल जाये।
बेला, जूही, हरसिंगार सन,
जीवन खुशबु से भर जाये।।
सरसों फूलो, मांजर महके,
धान, गेहुम लहराये।
केतारी सन रसगर हो जीवन,
मटर, मकई नियर गदराये।।
कोयल कूके, बुलबुल गाये,
तोता, मैना शोर मचाये।
आये गोरैया, पानी पिए,
अंगना में, धप्चुहिया मुस्काये।।
चुमनुमिया चिरैया शोर मचाये,
कागा आके भोर जगाये।
खिले गुलाब, गेंदा गोदी में,
कहे "साथी" बथान में गोरु-गाय डोंराय।।
*नव बर्ष की मंगलकामनाएं..*
अरुण साथी, पत्रकार, बरबीघा, (बिहार)
सोमवार, 26 दिसंबर 2016
आम आदमी
भागमभाग
उठापटक
कभी उधर
कभी इधर
सपने-हकीकत
घर-परिवार
दोस्ती-यारी
देश-समाज
दाल-रोटी
की जद है जिंदगी..
**
घिसे चप्पल
सिले जूते
चिप्पी पैंट
फटे जेब
फटी चादर
और लंबे पैर
की हद है जिंदगी..
**
एक चुटकी ईमानदारी
मुठ्ठी भर बेईमानी
मन भर आत्मा
छटाँक भर परमात्मा
बड़े बड़े बोल
कर्म, कुकर्म
बस यही सब
कशमकश है ज़िन्दगी...
***
सुबह सूरज उगे
कि फूल खिले
पंछी के गीत हो
कि शाम ढले
नया साल आये
कि पुराना साल जाये
आम आदमी के लिए
तो बस
जद्दोजहद है जिंदगी..
(27-12-16)
बुधवार, 30 नवंबर 2016
विरहन..
हौले से मुस्कुरा,
आहिस्ते से मचलती है!
वैसे ही जैसे,
सूरज की लाली से
सूर्यमुखी खिलती है!

वैसे ही जैसे,
भौरे की गुनगुन से
कली की पंखुड़ी खुलती है!
वैसे ही जैसे,
चाँद की चांदनी से
चकोर मचलती है!
वैसे ही जैसे,
मोर नृत्य से
मोरनी पिघलती है!
वैसे ही जैसे,
प्रेमपुलक
गजगामिनी निकलती है!
वैसे ही जैसे,
प्यासी धरा से
मेघ मिलती है!
वैसे ही जैसे
धूप के ताप से
बर्फ पिघलती है!
और
वैसे ही जैसे,
सूर्य मिलन को
फीनिक्स पंक्षी
की अभीप्सा जलती है..
मंगलवार, 1 नवंबर 2016
झूठ की खेती
झूठ की खेती
(अरुण साथी)
वह बंजर जमीन हो
या कि हो
मरूभूमि
या हो
पठार-पर्वत
कुछ लोग
बड़े कुशल उद्यमी
होते है
और वे बंजर जमीन पे भी
झूठ की फसल बोते है
लच्छेदार बातों से
उसे सींचते
कोड़ते और निकोते है
सच कहता हूँ
कुछ लोग
झूठ की खेती करने में
बड़े मास्टर होते है..
गुरुवार, 29 सितंबर 2016
परिवार
परिवार
**
माँ-बाबु जी का
गलतियों पे डाँटना,
उदासी का कारण पूछ
दुःख बाँटना है।
अच्छा लगता है..
2
दोपहर को खाने का
मिसकॉल आना,
देर रात घर पहुँचने पे
बीबी का रूठ जाना।
अच्छा लगता है..
3
बिना वजह आप किसी से
भी क्यों उलझते है,
दुनिया की छोड़ अपनी
फ़िक्र करो; भाई का समझाना।
अच्छा लगता है...
4
बेटा का खिलौने
की जिद्द नहीं पकड़ना
टूटे जूते को देख टोकने पर,
अभी चलेगा पापा कहना।
अच्छा लगता है..
5
मुंहझौंसी, जरलाही कहके
बीबी को चिढाना,
मायके की शिकायत पे
उसका मुंह फूलना।
अच्छा लगता है..
6
बेटी की सहनशक्ति
गाहे-बेगाहे सामने आना,
अभावों को छुपा कर
उसका मुस्कुराना।।
अच्छा लगता है...
मंगलवार, 27 सितंबर 2016
दासी लोकतंत्र
दासी लोकतंत्र
**
साथी उवाच
"क्यों
जनतंत्र में
मालिक जनता
भूखी और प्यासी है?
राजा के घर क्रंदन
क्यों है?
क्यों मुख पे
छाई उदासी है?"
**
बकलोल उवाच
"क्योंकि
लोकतंत्र तो
वंशवादी,
जातिवादी,
धर्मवादी,
नेताओं के
चरणों की दासी है।।।
(शपथ ग्रहण के बाद उत्तरप्रदेश के मुखिया मुलायम सिंह के पैरों में लटके मंत्री गायत्री प्रजापति प्रसंग पे)
शनिवार, 17 सितंबर 2016
भूख और माँ
भूख और माँ
(सोशल मीडिया पे वायरल इस तस्वीर को देखकर साथी के शब्द.. निःशब्द..)
**
जिंदगी है
मौत है
और है
मौत से भी
भयावह
क्रूर
बर्बर
भूख..
इसीलिए तो
भूख और माँ
की लड़ाई में
भूख जीत जाता है
माँ हार जाती है..
अक्सर..
बुधवार, 14 सितंबर 2016
भक्त
"भक्त"
**
"अच्छे दिन"
और
"काला धन"
को जुमला
कहे जाने पर भी
जो आसक्त रहते है,
हे तात
कली काल में
उसे ही
भक्त कहते है..
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#साथी के #बकलोल वचन
रविवार, 11 सितंबर 2016
प्रहसन
यह एक प्रहसन है
लोकतंत्र का प्रहसन
यहाँ
लिखी गयी पटकथा पे
अभिनय करते है
लोग
तभी तो
वही लोग
जो कल तक
रावण को मानते थे
राक्षस,
आज अचानक
भगवान् मानने लगे..!
वही लोग
जिनके लिए पाप था
सीता का
अपहरण
द्रोपदी का
चीरहरण
लाक्षागृह दहन
दुर्योधन का
अत्याचार,
आज इसे ईश्वर की
इच्छा मानने लगे..
वही कृष्ण
जाने कैसे
कुरुक्षेत्र में
आकर
कहने लगे
"हे तात
लाभ-हानि
जीवन-मरण
यश-अपयश
सब कुछ विधि हाथ..
गुरुवार, 8 सितंबर 2016
तूती की आवाज
बुधवार, 3 अगस्त 2016
धुंधले रिश्ते
जिंदगी अब कहाँ किसी
सिरहाने टिकती है।
हर एक रिश्तों की अब
धुंधली सी तस्वीर दिखती है।।
◆कोई होकर भी अपना,
कभी अपना न हुआ।
किसी की जिंदगी गैरों
की खातिर ही बिकती है।।
◆जाने क्या रिश्ता है
अपना उनसे।
वो पगली मुझे देख कर
बेवजह हंसती है।।
◆देखा है अलग अलग
चेहरे रिश्तों के यहाँ,
सुना है रिश्ते भी अब
ब्यूटी पार्लरों में सजती है।।
