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शनिवार, 31 दिसंबर 2016

महुआ महके..

महुआ महके तोर अंगना में,
सूरजमुखी खिल जाये।
बेला, जूही, हरसिंगार सन,
जीवन खुशबु  से भर जाये।।

सरसों फूलो, मांजर महके,
धान, गेहुम लहराये।
केतारी सन रसगर हो जीवन,
मटर, मकई नियर गदराये।।

कोयल कूके, बुलबुल गाये,
तोता, मैना शोर मचाये।
आये गोरैया, पानी पिए,
अंगना में, धप्चुहिया मुस्काये।।

चुमनुमिया चिरैया शोर मचाये,
कागा आके भोर जगाये।
खिले गुलाब, गेंदा गोदी में,
कहे "साथी" बथान में गोरु-गाय डोंराय।।

*नव बर्ष की मंगलकामनाएं..*
अरुण साथी, पत्रकार, बरबीघा, (बिहार)

गुरुवार, 9 दिसंबर 2010

नेतवा सब भरमाबो है. (मगही कविता)

अब तो नेतवा सब जनता के देखा खूब भरमाबो है.
गली गली जे दारू बेचे, ओकरे खूब जीताबो है.

पहले हलथिन रंगबाज
फिर कहलैलथिन ठेकेदार
अब हो गेलथिन एमएलए
जनसेवका के सब हंसी उडाबो है।
अब तो नेतवा सब जनता के देखा खूब भरमाबो है.


सूट बूट है उजर बगबग
स्कारपीयों  करो है जगमग
टूटल साईकिल से ई लगदग
कहां से, कोय नै ई बतावो है।
अब तो नेतवा सब जनता के देखा खूब भरमाबो है.



अनपढ़ हो गेलइ हे मास्टर
गोबरठोकनी हो गेलइ हे सिस्टर
बड़का बाप के बेटा हे डागडर
फर्जी डिग्री के फेरा में
ग्रेजुएट भैंस चराबो है।
अब तो नेतवा सब जनता के देखा खूब भरमाबो है


कभी मण्डल
कभी कमण्डल
कभी राम और
कभी रहीम
आग लगाके नेतवन सब
घर बैठल मौज उड़ावो है।
अब तो नेतवा सब जनता के देखा खूब भरमाबो है


की कुशासन
की सुशासन
गरीबन झोपड़ी नै राशन
चपरासी से अफसर तक
सभे महल बनाबो है।
अब तो नेतवा सब जनता के देखा खूब भरमाबो है



लोकतन्त्र में
कागवंश के
राजहंश सब
बिरदावली अब गावो है

चौथोखंभा भी रंगले सीयरा संग 
हुआ हुआ चिल्लाबो है
हुआ हुआ चिल्लावो है..........