शुक्रवार, 15 अक्तूबर 2021

दलित सवर्णों से पहले मंदिर में करते हैं प्रवेश, होता है प्रतीकात्मक युद्ध

दलित सवर्णों से पहले मंदिर में करते हैं प्रवेश, होता है प्रतीकात्मक युद्ध


सवर्णों और दलितों के बीच भेदभाव, छुआछूत, शोषण, दमन के किससे से हटकर एक सकारात्मक यथार्थ की दूसरी क़िस्त। हालांकि इस तरह के यथार्थ को ना तो सोशल मीडिया पर ज्यादा उछाल मिलेगा, ना ही बड़े बड़े मीडिया घराने इस को महत्व देंगे। ऐसी बात नहीं है कि सकारात्मक बातें नहीं है पर समाज में घृणा को बढ़ाने के मामले अधिक मिलते हैं। ऐसी बात नहीं होती तो बिहार केसरी डॉक्टर श्री कृष्ण सिंह, ब्राह्मणों और पंडितों से लड़कर मुख्यमंत्री रहते हुए देवघर के मंदिर में दलितों के प्रवेश को लेकर इतना संघर्ष नहीं करते। समाज को दलितों से भेदभाव, छुआछूत मिटाने के लिए संदेश नहीं देते।


खुशी-खुशी सवर्ण दलितों से पराजय को स्वीकार करते हैं। खुशी खुशी उन्हें सबसे पहले मंदिर में प्रवेश करने दिया जाता है। खुशी-खुशी जब दलित मंदिर में पूजा कर लेते हैं तब सवर्णों की पूजा शुरु होती है।


शेखपुरा जिले में यह मामला मेहुस गांव में भी देखने को मिलता है। यह भूमिहार बहुल गांव है। यहां माता माहेश्वरी का सिद्धि पीठ है। जहां नवमी के दिन भूमिहार और दलितों के बीच प्रतीकात्मक युद्ध होता है। इस युद्ध में भूमिहार समाज के लोग रावण की सेना बनते हैं और दलित समाज के लोग राम की सेना बनते हैं ।

दोनों के बीच नवमी के दिन प्रतीकात्मक युद्ध होता है । इस युद्ध में भूमिहार समाज के लोग दलितों को मंदिर में प्रवेश करने से रोकते हैं। दोनों सेना में युद्ध होती है और भूमिहार समाज के लोग इसमें खुशी खुशी हार जाते हैं। और फिर दलित मंदिर में खुशी खुशी प्रवेश करते हैं। जिसके बाद सभी तरह की पूजा गांव में शुरू होती है।


यह परंपरा कई सदियों पुरानी है। ग्रामीण अंजेश कुमार कहते हैं कि इस परंपरा के कई मायने हैं। रावण और राम के युद्ध के बहाने दलित समाज को सम्मान देने और आपसी भेदभाव मिटाने को लेकर यह परंपरा वर्षो से चली आ रही है। दलित समाज के लोग पहले मंदिर में प्रवेश करते हैं तभी मंदिर में किसी तरह की पूजा पाठ शुरू होती है। दलितों के मंदिर में प्रवेश की रोक को लेकर देश दुनिया में कई चर्चाएं हैं परंतु यहां माता महेश्वरी के मंदिर में दलित ही पहले मंदिर में प्रवेश करते हैं। प्रतीकात्मक युद्ध होता है। भूमिहार की हार होती है।और दलित मंदिर में प्रवेश कर पूजा का शुभारंभ करते हैं। भाईचारा और सामंजस्य का यह एक अनूठी मिसाल है जो देश में कहीं नहीं मिलेगी।

गुरुवार, 7 अक्तूबर 2021

हे दुर्गे

हे दुर्गे
***
नवरात्र में
पुरुषों के मन में
नारी के लिए
कितना सम्मान है..?
कहीं पूजा
कहीं हवन
कहीं पाठ
कहीं उपवास
कहीं अनुष्ठान है..!

हे माँ दुर्गे 
बताओ
कोख में मरती बेटी
दहेज हेतु जलती बहू 
आबरू लूट कर
अट्टहास करने वाला
कहाँ रहता वह शैतान है...?

सोमवार, 30 अगस्त 2021

भगवान होने के लिए..

#भगवान
कैदखाने में
माँ देवकी
मौत के आगोश में
जिसे जन्म दिया
वही कृष्ण है


माता यशोदा
का प्यार और
कभी कालिया नाग
तो कभी राक्षसी
से जो बच पाया
वही कृष्ण है

माखन चुराया
गैया चराई
सुदामा का
चबेना खाया
और द्वारिकापुरी में
सुदामा को गले लगाया
वही तो कृष्ण है


राधा का प्रेम मिला
और राधा जिसे न मिली
वही तो कृष्ण है

परमेश्वर होकर भी
जिसे परमेश्वर होने है
अभिमान न आया
वही तो कृष्ण है


जिसे
भगवान होने के लिए
कृष्ण होना पड़ता है
वही तो कृष्ण है...
(तस्वीर बेटी प्रति राजनंदनी की बनाई हुई)

शनिवार, 17 जुलाई 2021

दानिश

दानिश
उसकी कानों को
सच सुनने की आदत नहीं है
न ही उसकी आँखों को
सच देखना अच्छा लगता है

फिर कैसे वह दानिश को पसंद करता
उसकी तस्वीरों से उठती चीत्कार से
कांप जाए करेजा कसाई का भी
फिर उसका करेजा भी लरजता होगा

पूछते है सभी, दानिश को 
आखिर मारा किसने
आखिर कुछ लोग मौन क्यों है
और कुछ लोग कठहंसी कर रहे

सुनों, 
दानिश को उसीने मारा
जिससे वह लड़ रहा था

तालिबानी,
इधर के हों
या उधर के
फर्क क्या पड़ता है...

मंगलवार, 1 जून 2021

एक गांव-अनेक गांव


हर गांव में बसते हैं कई गांव 
एक गांव में एक गांव अमीरों का होता है
एक गांव में दूसरा गांव गरीबों का होता है 
गरीबों के गांव में भी अमीर बसते हैं 
और अमीरों के गांव में भी गरीब बसते हैं

हर गांव में अमीर शोषक होते हैं 
और गरीब शोषित 
आप इसे जातियों में भी खंडित कर देखिए 
मैं इसे वर्ग संघर्ष के रूप में देखता हूं

शनिवार, 29 मई 2021

अनुत्तरित

अनुत्तरित
--
खुद ही भट्ठी बनाई 
भाथी भी खुद ही बनाया
खुद ही कोयले सजाए 
धीरे-धीरे भाथी से हवा दी
आग सुलगाई

फिर खुद ही खुद को
झोंक दिया
लहलह लहकती भट्ठी में

फिर खुद ही छेनी-हथौड़ा ले
काट-पीट कर 
औजार बनाए 
कभी हंसुआ 
कभी हथौड़ा
कभी खुरपी 
कभी हल 
कभी कलम 
कभी-कभी तलवार भी

फिर एक दिन 
अपनों ने ही पूछ लिया 
किया क्या जीवन भर...

सोमवार, 24 मई 2021

घर-वापसी

दरवाजे खिड़कियां
खुली रखी थी हमेशा
हर कोई आ-जा सकता था
बेरोकटोक
हवाओं की तरह
दृश्य-अदृश्य
स्पृह-अस्पृह
न जाली, न पर्दे, न शीशे
सब कुछ खुला खुला
एक दिन अचानक
मृत्यु ने दस्तक दी
कहा, चलो
चौंक गया
यह क्या
ना शोर, न शराबा
ना विरोध, न प्रतिरोध
यह कैसे
कहा- घर वापसी

रविवार, 28 मार्च 2021

होलिका में कौन जला..


जब भी होलिका को

जलते हुए देखोगे

तो वहां होलिका को
जलते हुए मत देखना
यह देखना कि कैसे
आज भी हिरण्यकश्यप
स्वघोषित ईश्वर कहलाता है

कैसे वह
अपने ही पुत्र के लिए
चिता सजाता है
कैसे आग से नहीं
जलने वाली होलिका को
उसमें बैठाता है
कैसे होलिका जल जाती है
प्रह्लाद बाहर निकल आता है

और सुनो
यह भी देखना कि
उसमें हम ही तो नहीं जल रहे हैं..

जोगीरा

1
बेच दिए रेल
बेच दिए जहाज
बेच कर रोजगार
साहेब बने बन्दनवाज
जोगीरा सारा रा रा
2
खरीद लिए कैमरा
खरीद लिए कलम
अब तो चारणी कर
चौथे पौव्वा कर रहा रस्म
जोगीरा सारा रा रा
3
रो रहे किसान
रोये नौजवान
रो रही है धरती माता
हँस रहे भक्तजन महान
जोगीरा सारा रा रा

***
लाल रंग नियर लहराये जिनगी,
हरियर-हरियर हो घर परिवार!
सतरंगी हो मन का आंगन,
इंद्रधनुष हो ई संसार!!

स्नेह लुटाहो सब जन मिलके,
बग बग उज्जर हो मन के द्वार!
बैर मिटाहो जात-धरम के,
खुशियाँ बाँटहो अपरंपार!!

होली के हार्दिक शुभकामनाएं!!

रविवार, 21 मार्च 2021

प्रेम की तस्वीर

#अहोभाव
आंखों से लिखो प्रेम प्रिये
आंखों से पढ़ो प्रेम प्रिये
आंखों से कहो प्रेम प्रिये
आंखों से सुनो प्रेम प्रिये
**
अकारण कारण प्रेम प्रिये
निराकारी आकार प्रेम प्रिये
सर्व साकार प्रेम प्रिये
राधे का आधार प्रेम प्रिये
कन्हैया का सार प्रेम प्रिये

(प्रेम की तस्वीर! व्हाट्सएप से प्राप्त प्रेम की जीवंत  तस्वीर ! )

सोमवार, 8 मार्च 2021

पंख

#पंख
पहले पंख लगाए
फिर चलना सीखा
फिर पंख फैलाये
फिर उड़ना सीखा

फिर सपने संजोए
आसमान को छूने की
फिर संघर्ष किया
बुलंदी तक उड़ने की

उसे नागवार लगा
उससे ऊंचा वह
कैसे उड़ सकती है

उसने पर कतर दिए..

बुधवार, 2 दिसंबर 2020

कट्टरपंथी

वे ईश्वर के नाम पर
फ्रांस में गला काटने का
विरोध करते हैं

वे फ्रांस के शार्ली हेब्दो में 
कार्टून बनाने पर 
नरसंहार की निंदा करते हैं

वे आतंकवाद को 
इस्लामी आतंकवाद 
कहते हैं

वे स्त्री स्वतंत्रता
अभिव्यक्ति की आजादी पर
पाकिस्तान में प्रतिबंध
को तालिबानीकरण कहते है


वही लोग दीपावली के 
पटाखों में धर्म देखते हैं 

सिनेमा में धर्म
पे सवाल उठते ही
उठ खड़े होते है

वही लोग तनिष्क के विज्ञापन 
पर बवेला करते हैं 

वही लोग प्रेम को
लव जिहाद से परिभाषित 
करते है

कौन है ये लोग
जो उन्हीं के जैसा होना चाहते हैं..



शनिवार, 14 नवंबर 2020

#दीया और #आदमी

#दीया और #आदमी
**
वह जल रहा है
अनवरत
टिमीर टिमीर
टिमटिम
**
मद्धिम सी लौ
सारे जहां को
कहाँ कर पाती रौशन
**
हवा के थपेड़े
बाती का संघर्ष
तेल का तपन
माटी का दीया
दीया तले अंधेरा
और लौ की टिमटिम
**
सोंच रहा हूँ
दीया और 
संघर्षशील आदमी
कितना समान है..

शुक्रवार, 21 अगस्त 2020

देवदासी

देव-दासी
**
सुनो स्त्री
जंजीर सिर्फ लोहे की
ही नहीं होती
वह पांव में पायल
गले में मंगलसूत्र
माथे पे सिंदूर
हाथों में चूड़ियां
या फिर
करवा चौथ
तीज
जैसे 
कथित पवित्र प्रेम के 
रिश्तों की भी होती है

सदियों के लिए तुम्हें
गुलाम बनाया गया है
देव-दासी...

गुरुवार, 20 अगस्त 2020

पुनर्नवा

ठीक उसी दिन
जिस दिन
उसने मुझे
मौत दी थी
मेरा नया 
जन्म हो गया..

शनिवार, 11 अप्रैल 2020

लाक्षागृह

निज स्वार्थ 
सिद्धि में 
जब भाई को मारने 
भाई ही लाक्षागृह
सजायेगा

उस समय तो 
पांडव बच गए 
आज का भाई तो
मारा ही जाएगा

रविवार, 8 मार्च 2020

मरकर जीना..अच्छा होता है..

सुनो स्त्री
तुम खुश मत होना
महिला दिवस पे बधाई पाकर
क्योंकि ये वही लोग है
जो उपासना के बाद
कन्या पूजन कर
तुमको निर्भया बनाते है...

ये वहीं हैं
जो तीन तलाक
बुरके, हलाला
को मर्यादा कहते नहीं अघाते है..


ये वहीं है 
जो घरों से बाहर 
निकलते ही
तारते है तुम्हारे
उरोज, नितंब
और मुस्कराते है...

ये वहीं है
जिनकी हर गाली में
तुम्हारी अस्मिता 
तार तार होती है
फिर भी तुमको 
माँ, बहन और बेटी बताते है...

हाँ ये वहीं हैं
जो बलात्कारी को नहीं
तुम्हें कठघरे में लाते है
तुमको ही लजाते है
दहलीज से बाहर
कदम रखते है
तुम्हें कुलटा बताते है

ये वहीं है
जो बेच कर बेटों को
अपनी शान दिखाते है
फिर जला कर तुम्हें
अपनी मर्दांगी दिखाते है

सुनो स्त्री
न तुम पहली स्त्री हो
जिसके बोलने पे
जुबान काट दी गयी
न तुम आखरी स्त्री होगी
जो अपनी आज़ादी के लिए
लड़ते हुए जिबह कर दी जाओगी
समाज के न्यायालय में

हाँ, सुनो स्त्री
ये वही लोग है
तुम इनके हाथों लड़कर शहीद होना 
कबूल कर लेना
क्योंकि
जीते जी मरने से अच्छा
मरकर जीना होता है...

गुरुवार, 5 मार्च 2020

लाशखोर कौन..?

(यह तस्वीर मेरे बरबीघा की है। उसी को देख शब्द रूप वेदना है..)
यह नवजात लाश
किसकी है
और इसे नोंच कर खाने 
वाला कौन है..
ठीक से देखिये
**
हो सकता है
यह कर्ण हो और
हत्यारिन माँ कुंती..
और पिता 
सूर्य जैसा 
कोई प्रतापी
भगवान...
**
हो सकता है
चंदन टीका लगाए
कोई गिद्ध हो
जो हर रात एक 
नया शिकार
करता हो और
सुबह न्यायाधीश बन
फैसला सुना रहा हो...
***
हो सकता है
दहेज की बलि
बेदी पे चढ़ने से पूर्व
कोई बेटी हो
और उसकी लाश को
नोंच नोंच 
कर खाने वाला
हमारा समाज..
**
हो तो यह भी
सकता है कि
मलाला जैसी
कोई बेटी हो
जिसने अपने 
अधिकार
स्वावलंबन
गरिमा
सम्मान
की बात कर दी हो
और तालिबानी समाज
ने उसे सजाए मौत दे दी हो..
(यह तस्वीर ब्लर की गई है। कभी कभी सच को खुली आंखों से देखने का साहस जरूरी है..)







गुरुवार, 27 फ़रवरी 2020

दंगाई

एक तरह के दंगाई
धर्म देखकर
घर जलाए
गला काटा
गोली मारी
कत्ल किया
अस्मत लूटी
2
दूसरे तरह के दंगाई
धर्म देख कर
गुनाहगार तय कर रहे
धर्म देख कर 
बचाव कर रहे
धर्म देख कर
लाशों पे विलाप कर रहे



शुक्रवार, 10 जनवरी 2020

प्रेम मत मांगों

उस स्त्री ने 
प्रेम माँग लिया
उसे बहुत बुरा लगा
****
वह जानता था
स्त्री तो देह है
निष्प्राण 
मिट्टी का माधो
***
बेशर्म
बेहया
बेलज
छिनार
यह दुःसाहस
और
उसने उसे 
सजाए मौत दे दी

बुधवार, 25 दिसंबर 2019

सुनो जिंदगी

सुनो जिंदगी
***
यह ठीक है कि
तुम सीढ़ी हो
और सांप भी

यह भी ठीक ही है कि
सौ घरों में एक-एक कदम
चलकर दूरी तय करना होता है

यह भी ठीक है कि
एक पासे से तुम
सीढ़ी के सहारे
अर्श पे पहुंचा देती हो
तो दूसरे पासे से
सांप के सहारे
फर्श पे

पर सुनो जिंदगी
यह ठीक नहीं कि
पासे भी तुम्हारे पास हो
और चाल भी तुम्हीं चलो
कुछ तो मेरे हिस्से आने दो
सुनो जिंदगी

शनिवार, 7 दिसंबर 2019

स्त्री एक देह है

#देह

स्त्री एक देह है
माँ-बहन
बहु-बेटी नहीं..

उसे कैद करो
इज्जत के पिंजरे में
बलात्कार करो उसका
और इज्जत भी उसी की
लुट जाएगी
लुटेरे का नहीं...!

कभी भ्रूण हत्या
कभी दहेज हत्या
कभी लक्ष्मण रेखा
कभी सीता को कलंक
कभी पांचाली
कभी निर्भया
कभी उन्नाव
कभी दिशा

मर्यादापुरुषोत्तम
समाज में
मर्दांगी यही तो है...

मंगलवार, 17 सितंबर 2019

तितलियाँ

तितलियाँ
(अरुण साथी)
सबसे पहले कैद की
गयी होंगी
तितलियाँ!

फेंका गया होगा जाल
छटपटाई भी होंगी
तितलियाँ!

फिर कैद से उन्मुक्त होने
अपने पंखों को
फड़फड़ाई भी होंगीं
तितलियाँ!

फिर उत्कट आकांक्षा में
तोड़ दिए गए होंगे उनके पंख
तो रोई भी होंगी
तितलियाँ!

फिर लोकतंत्र के मसीहा
ने आकर मुक्त किया
और आह्लाद से दिग दिगंत
जयकार हुआ
तो क्या इस राजनीति को
समझ भी पायीं होंगी
तितलियाँ....

गुरुवार, 5 सितंबर 2019

सुनो प्रेम

सुनो प्रेम

अरुण साथी

सुनो प्रेम
अब तुम इस
पार मत आना
चाँद के उस पार
ही अपना घर बसाना

इस पार तो अब
बसेरा है नफरत का..

सुनो प्रेम
इस पार कहीं
धर्म तो कहीं जाति
और कहीं कहीं
औकात से तुम्हें
तौला जाता है

और कहीं तो
प्रेम लव जिहाद
भी हो जाता है..

फिर क्या
आदमी
आदमी को
अब यहाँ भून
के खाता है..

शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

राधा कृष्ण

कृष्ण इसलिए कृष्ण है
क्योंकि कृष्ण, कृष्ण है
कृष्ण माखन चोर है
कृष्ण भावविभोर है
कृष्ण बांसुरी बजैया है
कृष्ण ही तो कन्हैया है
कृष्ण कंस नाशक है
कृष्ण कैरव विनाशक है
कृष्ण राधा है
राधा कृष्ण है
कृष्ण मीरा है
मीरा कृष्ण है
कृष्ण प्रेम है
प्रेम कृष्ण है