शुक्रवार, 29 मार्च 2024

प्रेम की कविता


#प्रेम की #कविता
(अरुण साथी)
वह रोज मिल जाती है
कभी बीच सड़क
कभी गली में
कभी छत पे
कभी झरोखे से

कभी कभी
मिल जाती है
सपनों में भी

नज़रें मिलते ही
वह आहिस्ते से
मुस्कराती है

फिर नजरे झुका
चली जाती है
बस...


शुक्रवार, 1 मार्च 2024

आदमी, कुत्ता और कचरा

आदमी, कुत्ता और कचरा
कचरे का बड़ा ढेर
कचरे के ढेर को 
आदमी ने बड़े ही जतन से 
संग्रहित किया 
बरसों की मेहनत 
एक-एक कचरा से 
खड़ा किया साम्राज्य 
कचरे का 

और घोषित किया 
स्वयं को राजा 

हम ऐसे आदमी को 
विक्षिप्त कहते हैं 

और आश्चर्य तो यह कि 
वह भी हमें यही समझता है...

शेखपुरा रेलवे स्टेशन के पास इस तस्वीर को कैद करने के बाद मेरे शब्द..