शनिवार, 19 फ़रवरी 2022

समय की सीख

समय की सीख

(अरूण साथी)

समय से सीखा है
समय के विपरीत होते ही
कलेजे को पत्थर का करना

 
तेज ज्वारभाटा के बीच 
नाव की पतवार समर्पित कर 
धार में चुपचाप बहना


सीखा है यह भी कि
जब चारो ओर हो
धुप्प अंधेरा 
तो अपने अंदर 
को रौशन करना

जिनको शोर करने की 
आदत है वे जाने
हमने सीखा 
कर्मों से 
सच को सच
स्थापित करना

26 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर रविवार 20 फ़रवरी 2022 को लिंक की जाएगी ....

    http://halchalwith5links.blogspot.in
    पर आप सादर आमंत्रित हैं, ज़रूर आइएगा... धन्यवाद!

    !

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  2. जब समय के चूल्हे पर पके स्याही अनुभव की कलम में भरी जाती है तब ऐसी सिखपरख,प्रेरणादायी रचना आकर लेती है।
    बहुत ही अच्छा लगा भैया।🙏

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  3. Ye Aaj Ke samay me v ekdum suitable sabit hota hai....jaise hi ek kadam sachchayi ke oor badhate hain ki .... Kast pareshani turant welcome karne lagta hai ... Aur Khud ko patthar pahle hi banana hota hai ....!!!!


    Very well narrated sir...!!!

    Kind Regards
    Monu Kumar

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  4. सच केवल आपका सहज अनुभव है
    स्थापित विराम है
    शुभकामनाए

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  5. बहुत ही उम्दा बाद शानदार रचना

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  6. बहुत ख़ूब !
    समय की धारा के साथ तो लाखों-करोड़ों बहते हैं लेकिन मज़ा तो तब है जब समय की धारा के विपरीत तैर कर अपनी मंजिल तक पहुंचा जाए.

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  7. आदरणीय अरुण साथी जी, आपकी इस रचना की पंक्तियाँ जीवन के दर्शन की अभिव्यक्ति है।
    सीखा है यह भी कि
    जब चारो ओर हो
    धुप्प अंधेरा
    तो अपने अंदर
    को रौशन करना
    बहुत सुंदर! हार्दिक साधुवाद!--ब्रजेंद्रनाथ

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    उत्तर
    1. आदरणीय

      आपके शब्द रूपी स्नेह से मन आह्लादित हो गया। हौसला मिला। आभार

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  8. बहुत सुंदर सराहनीय प्रेरक रचना ।

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  9. आंखों में गुजारा कई रातों को,
    मेहनत का नहीं छोड़ा कभी साथ।
    आज हर कोई बात कर रहा है तेरी,
    जिससे भी हो रही है तेरी मुलाकात।।
    आपको आपकी इस रचना के लिए ढेर सारी बधाई👍👍

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  10. जीव जीने की सार्थक सीख देती
    बहुत अच्छी रचना
    सादर

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  11. सीखा है यह भी कि
    जब चारो ओर हो
    धुप्प अंधेरा
    तो अपने अंदर
    को रौशन करना,,,,,,जीने को प्रेरित करती रचना,

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