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शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

शगल

जिंदगी का अजीब फ़लसफ़ा है,
हर एक आदमी दूसरे से खफा है!

गैरों के गुनाहों का बही-खाता है सबके पास,

बस अपने गुनाहों का हिसाब रफा-दफा है!

तौहीन करने का शगल ऐसा है उनका,
खुद ही तोहमत लगा लेते कई दफा है!

किसपे करूं यकीन कहो तो "साथी",
करो भरोसा जिसपे मिलती जफ़ा है!!