जिंदगी का अजीब फ़लसफ़ा है,
हर एक आदमी दूसरे से खफा है!
गैरों के गुनाहों का बही-खाता है सबके पास,
बस अपने गुनाहों का हिसाब रफा-दफा है!
तौहीन करने का शगल ऐसा है उनका,
खुद ही तोहमत लगा लेते कई दफा है!
किसपे करूं यकीन कहो तो "साथी",
करो भरोसा जिसपे मिलती जफ़ा है!!