केजरू भैया
भज-पा के तुलना
आईएसआई
कर देलखुन!
मने की
गुणवत्तापूर्ण प्रोडक्ट
के सर्टिफिकेट
लगले धर देलखुन..!!
#साथी के #बकलोल_वचन
केजरू भैया
भज-पा के तुलना
आईएसआई
कर देलखुन!
मने की
गुणवत्तापूर्ण प्रोडक्ट
के सर्टिफिकेट
लगले धर देलखुन..!!
#साथी के #बकलोल_वचन
साथी
ठोकरें खाकर अपनों की
जब से संभल गए साथी!
दुनियादार क्या हुआ,
कहते हैं बदल गए "साथी"!!
जिनसे था ग़ुरूर वही
लोग मतलबी निकले,
एक कदम जो तेज चला,
चाल चल गए साथी!!
इक मोहब्बत के नाम जो
कर दी जिंदगी अपनी!
जमाने ने हँसकर कहा,
बेगैरत निकल गए साथी!!
छाँव बनकर ताउम्र
जिनके साथ रहा,
दौरे गुरबत में मुंह फेर
वे भी निकल गए साथी!!
#अरुण_साथी (21/11/17)
प्रकांड विद्वान
सिद्ध तपस्वी
शिव भक्त
ब्रह्मा वंशज
स्वप्नद्रष्टा
अजर-अमर
होकर भी वह
नायक नहीं
कहलाता है,
एक अहँकार से
हर कोई रावण
हो बन जाता है..
आईये इस दशहरा
अपने अहंकार का
पुतला बनाते है,
अपने ही हाथों
अपने अंदर के
रावण को जलाते है..
अरुण साथी
(विजयादशमी की शुभकामनाएं)
कौरव कौन, कौन पांडव (कविता)
*अटल बिहारी वाजपेयी*
कौरव कौन
कौन पांडव,
टेढ़ा सवाल है।
दोनों ओर शकुनि
का फैला
कूटजाल है।
धर्मराज ने छोड़ी नहीं
जुए की लत है
हर पंचायत में
पांचाली
अपमानित है।
बिना कृष्ण के
आज
महाभारत होना है,
कोई राजा बने,
रंक को तो रोना है।
प्रस्तुति:-अरुण साथी
एक मुसलसल सी कमी बाकी रख!
पावों तले थोड़ी सी जमीं बाकी रख!!
ठोकरों से संभलना सीख ले "साथी"!
आंखों में थोड़ी सी नमी बाकी रख!!
महबूब को बेबफा न कहा करो यूँ ही,
मोहब्बत पे थोड़ा सा यकीं बाकी रख!!
@अरुण साथी 21/05/17
एक मुसलसल सी कमी बाकी रख!
पावों तले थोड़ी सी जमीं बाकी रख!!
ठोकरों से संभलना सीख ले "साथी"!
आंखों में थोड़ी सी नमी बाकी रख!!
महबूब को बेबफा न कहा करो यूँ ही,
मोहब्बत पे थोड़ा सा यकीं बाकी रख!!
@अरुण साथी 21/05/17
अफ़ीम
**
भूख
गरीबी
बेरोजगारी
अशिक्षा
से बिलखते
माँ भारती के बच्चों को
वे बड़ी आसानी से सुला देते है,
**
ये राजनेता
जागने से पहले ही
बच्चों को फिर से
धर्म की अफ़ीम चटा देते है..
@arunsathi
दहेज प्रथा
बाल विवाह
जात-पात
खतम करे के
नीतीश जी
के जगलो हें चाह,
मने की,
पोलटिक्स छोड़
साहेब पकड़ता अब
सन्यास आश्रम के राह..
#साथी के #बकलोल_वचन
जिंदगी का अजीब फ़लसफ़ा है,
हर एक आदमी दूसरे से खफा है!
गैरों के गुनाहों का बही-खाता है सबके पास,
बस अपने गुनाहों का हिसाब रफा-दफा है!
तौहीन करने का शगल ऐसा है उनका,
खुद ही तोहमत लगा लेते कई दफा है!
किसपे करूं यकीन कहो तो "साथी",
करो भरोसा जिसपे मिलती जफ़ा है!!
जबसे कजरी
बिना पेंदी का लोटा हुआ,
तब से एक एक
वोट का टोटा हुआ..
2
उम्मीद टूटने बालों
का लगा है श्राप,
जमानत जप्ती का
रिकॉर्ड बना रही "आप"..
#साथी के #बकलोल_वचन
परजीवी
****
यार-दोस्त
भाई-बंधु
समान होता है,
और साथ रहकर
आदमी खून चूस
खोखला कर देता है..
साथी के बकलोल वचन
🙈🙊🙉
हे राम
अपने जीवन में
राम के आदर्शों को
रत्ती भर भी
नहीं उतार रहे हैं,
वैसे लोग भी
चौक-चौराहे पर
जय श्रीराम
चिंघाड़ रहे हैं ...
कैसा कलिकाल
आया अब तो
रावण के वंशज ही
धर्म ध्वजा लेकर
राम को मार रहे हैं...
दुनिया की आबोहवा में जहर बहुत है,
चलो अब मुठ्ठी भर ताजी हवा चुन लें!!
मजहब तो नफ़रत बांटता है आजकल,
चलो अब कोई नया खुदा चुन लें!!
काम जिनका है कातिलों का "साथी",
चलो अब रास्ता उनसे जुदा चुन लें!!
जिंदगी में जख्मों का हिसाब मत रख।
गम के पन्ने हो, वैसी किताब मत रख।।
बच्चों की तरह जीता चल जिंदगी।
चेहरे पे कोई भी नकाब मत रख।।
जिससे है शिकवा तो बता दे उसको।
दिल में छुपा के आफताब मत रख।।
यूपी के बौराल होली
(अरुण साथी)
यूपी वाला पे फगुआ के
चढ़लो ऐसन उमंग,
दबा दबा के ईवीएम के
कैलक खूब हुड़दंग
जोगीरा सारा रा रा...
मोदी जी भी पी
लेलका जैसे भंग,
बोल-कुबोल से छोड़ा
देलका यूपी के जंग
जोगीरा सारा रा रा...
सोंच रहल हे बबुआ
बाबू-चाचा से कैलक काहे जंग
चिंता में डूबल डिम्पल भौजी
केकरा डाले रंग
जोगीरा सारा रा रा...
रो रहल हे राहुल बाबा
मम्मी जी के संग
बहिन जी के ब्लड प्रेशर बढ़ गेल
केजरी कहलक "जनता है मन-मतंग"
जोगीरा सारा रा रा...
(अरुण साथी)
आंय जी,
प्रेम विवाह के
दो दशक हुए आपने मुझे
कभी वेलेंटाइन विश नहीं किया..!
मैंने कहा, बंदरी
आजकल के लौंडे
कई को विश करते है।
एक को कॉल तो
दूसरी को मिस करते है।
तीसरी से व्हाट्सअप
तो चौथी से फेसबुक पे
चैटिंग है,
नए दौर के मजनुओं का
दर्जनों से सेटिंग है..
मेरे जैसा प्रेम करके
पत्नीव्रता होना
बकलोली है,
इसी लिए तो आपकी
इतनी बढ़ी हुई बोली है!
प्रेम प्रदर्शन नहीं
आत्माओं का मिलन है।
प्रेम ईश्वर का
प्रसाद है।
प्रेम समर्पण
और त्याग है।
बस क्या
बंदरी ने किस किया,
मुझको भी वेलेंटाइन विश किया..!
वजूद
**
तेज ताप से
खौल उठता है
वजूद...
और उधियाने
लगता है
तभी कोई अपना
पानी का छींटा देकर
संभल लेता है..
उधियाते वजूद को..
(तस्वीर को कैद करते हुए दो शब्द गढ़ दिए..)
@अरुण साथी
मौत से पहले...
बहुत भचर-भचर करते हो
मार दिए जाओगे
एक दिन
उन्हीं लोगों की तरह..
लगी होगी एक-आध गोली
पीठ में, सीने में
या कनपट्टी के आसपास कहीं..
बीच सड़क पे
बिखर जायेगा तुम्हारी रगो
का खौलता हुआ खून
और लहू का लाल रंग
काली तारकोल से मिलकर
गडमड रंग का हो जायेगा...
हाँ, कुछ लोग आएंगे
सहानुभूति जताएंगे
पर कुछ लोग वहीं
लाश के सिरहाने ही
गाली भी देंगे
कुछ बुरा,
कुछ भला कहेंगे..
क्यों और किसके लिए
यह सब करते हो...
उपरोक्त आत्मीय
वचनों के बीच के
अंतर्मन में
नाद गूँज उठा
"मौत से पहले कौन मरा है?"
"मौत आने पर कौन बचा है..?"
"अहिंसा परमो धर्मः"
कहने वाले गाँधी की
तस्वीर खादी से मिटा दी....
हंगामा क्यों है बरपा
जो उन्होंने अपनी
फितरत बता दी.….
#साथी के #बकलोल_वचन
महुआ महके तोर अंगना में,
सूरजमुखी खिल जाये।
बेला, जूही, हरसिंगार सन,
जीवन खुशबु से भर जाये।।
सरसों फूलो, मांजर महके,
धान, गेहुम लहराये।
केतारी सन रसगर हो जीवन,
मटर, मकई नियर गदराये।।
कोयल कूके, बुलबुल गाये,
तोता, मैना शोर मचाये।
आये गोरैया, पानी पिए,
अंगना में, धप्चुहिया मुस्काये।।
चुमनुमिया चिरैया शोर मचाये,
कागा आके भोर जगाये।
खिले गुलाब, गेंदा गोदी में,
कहे "साथी" बथान में गोरु-गाय डोंराय।।
*नव बर्ष की मंगलकामनाएं..*
अरुण साथी, पत्रकार, बरबीघा, (बिहार)
भागमभाग
उठापटक
कभी उधर
कभी इधर
सपने-हकीकत
घर-परिवार
दोस्ती-यारी
देश-समाज
दाल-रोटी
की जद है जिंदगी..
**
घिसे चप्पल
सिले जूते
चिप्पी पैंट
फटे जेब
फटी चादर
और लंबे पैर
की हद है जिंदगी..
**
एक चुटकी ईमानदारी
मुठ्ठी भर बेईमानी
मन भर आत्मा
छटाँक भर परमात्मा
बड़े बड़े बोल
कर्म, कुकर्म
बस यही सब
कशमकश है ज़िन्दगी...
***
सुबह सूरज उगे
कि फूल खिले
पंछी के गीत हो
कि शाम ढले
नया साल आये
कि पुराना साल जाये
आम आदमी के लिए
तो बस
जद्दोजहद है जिंदगी..
(27-12-16)

झूठ की खेती
(अरुण साथी)
वह बंजर जमीन हो
या कि हो
मरूभूमि
या हो
पठार-पर्वत
कुछ लोग
बड़े कुशल उद्यमी
होते है
और वे बंजर जमीन पे भी
झूठ की फसल बोते है
लच्छेदार बातों से
उसे सींचते
कोड़ते और निकोते है
सच कहता हूँ
कुछ लोग
झूठ की खेती करने में
बड़े मास्टर होते है..
परिवार
**
माँ-बाबु जी का
गलतियों पे डाँटना,
उदासी का कारण पूछ
दुःख बाँटना है।
अच्छा लगता है..
2
दोपहर को खाने का
मिसकॉल आना,
देर रात घर पहुँचने पे
बीबी का रूठ जाना।
अच्छा लगता है..
3
बिना वजह आप किसी से
भी क्यों उलझते है,
दुनिया की छोड़ अपनी
फ़िक्र करो; भाई का समझाना।
अच्छा लगता है...
4
बेटा का खिलौने
की जिद्द नहीं पकड़ना
टूटे जूते को देख टोकने पर,
अभी चलेगा पापा कहना।
अच्छा लगता है..
5
मुंहझौंसी, जरलाही कहके
बीबी को चिढाना,
मायके की शिकायत पे
उसका मुंह फूलना।
अच्छा लगता है..
6
बेटी की सहनशक्ति
गाहे-बेगाहे सामने आना,
अभावों को छुपा कर
उसका मुस्कुराना।।
अच्छा लगता है...