शनिवार, 6 फ़रवरी 2010

पाती प्रेम की

पाती प्रेम की

तुम्हारे सौन्दर्यबोध में मैंने बहुत से शब्द ढूंढे़

अपनी भावनाओं को कोरे कागज पर बारम्बार उकेरा

फिर उसके टुकडे़-टुकड़े किए

हर बार शब्द शर्मा जाते........

फिर इस तरह किया मैंने

अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त

गुलाब की अबोध-नि:शब्द पंखुड़ी को

लिफाफे में बन्द कर तुम्हें भेज दिया......................

5 टिप्‍पणियां:

  1. फिर इस तरह किया मैंने

    अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त

    गुलाब की अबोध-नि:शब्द पंखुड़ी को

    लिफाफे में बन्द कर तुम्हें भेज दिया......................
    Wah!

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्‍छी लगी आपकी रचना .. इस नए चिट्ठे के साथ हिन्‍दी चिट्ठा जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

    उत्तर देंहटाएं