बुधवार, 25 जनवरी 2012

अपने ही देश में तिरंगा पराया हो जाएगा।



किसने सोंचा था

‘‘केसरिया’’

आतंक के नाम से जाना जाएगा।

‘‘सादा’’

की सच्चाई गांधी जी के साथ जाएगा।

‘‘हरियाली’’

के देश में किसान भूख से मर जाएगा।


और

कफन लूट लूट कर स्वीस बैंक भर जाएगा।


किसने सोंचा था

लोकतंत्र में
गांधीजी की राह चलने वाला मारा जाएगा।

आज भी भगत सिंह फंसी के फंदे पर चढ़़ जाएगा।

किसने सोंचा था

भाई भाई का रक्त बहायेगा।

देश के सियाशत दां आतंकियों के साथ जाएगा।

अपने ही देश में तिरंगा पराया हो जाएगा।

और हमारा देश
शान से
आजादी का जश्न मनाएगा।


जय हिंद।

12 टिप्‍पणियां:

  1. सच कहा ...

    बस उम्मीद ही कर सकते हैं कि.... ऐसा कुछ नहीं होगा

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  2. बहुत खूब ...सुंदर अभिव्यक्ति...

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  3. वसंत पंचमी की शुभकामनायें! माँ सरस्वती की कृपा बनी रहे!

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  4. कविता के शब्द कटु सत्य को उद्घाटित कर रहे हैं।

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  5. तिरंगा पराया नहीं , खेलने की चीज बना दी गई है ! दुखद है , पर आज भी जिंदा हैं वे , जिनसे हिन्दुस्तां है

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  6. बहुत बेहतरीन और प्रशंसनीय.......
    बसंत पचंमी की शुभकामनाएँ।

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