सोमवार, 1 अक्तूबर 2018

हे राम

पहले हम विधर्मियों की
मौत पे जश्न मनाते थे

फिर हम विजातियों की
मौत पे जश्न मनाने लगे

आहिस्ते आहिस्ते हमारी
संवेदना मरती जाएगी

और तब हम स्वजातियों की
मौत जश्न मनाएंगे

फिर हम पड़ोसियों की
मौत जश्न मनाने लगेंगे

और फिर एक दिन
राजनीतिज्ञ हमे मर देंगे

और हम अपनी ही
मौत का जश्न मनाने लगेगें

इंतजार कीजिये, बस
गनहिं महत्मा की जै

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