खौफ मुझकों न कभी तुफां का रहा,
मैं जलता हूं अपने जुनूं का असर लेकर।
जिंदगी से है मोहब्बत, पर मौत से भी यारी है,
ये समुद्र लौट जाओं तुम अपना कहर लेकर।।
वे और होगें जो मरते हैं गुमनाम होकर,
इस जहां में मैं जिंदा रहूंगा, अमर होकर।
2
कभी कभी जिंदगी भी दगा देती है, देर तक साथ रह, सजा देती है।
बेमुरौव्वतों की वस्ती में साथी, मौत भी आकर कभी वफा देती है।।
3
गुरवतों के दिन भी तुमने शिददत से निभाई यारी।
साथी, बेमुरौव्वत जहां में तुमको नहीं आती दुनियादारी।।
मैं जलता हूं अपने जुनूं का असर लेकर।
जिंदगी से है मोहब्बत, पर मौत से भी यारी है,
ये समुद्र लौट जाओं तुम अपना कहर लेकर।।
वे और होगें जो मरते हैं गुमनाम होकर,
इस जहां में मैं जिंदा रहूंगा, अमर होकर।
2
कभी कभी जिंदगी भी दगा देती है, देर तक साथ रह, सजा देती है।
बेमुरौव्वतों की वस्ती में साथी, मौत भी आकर कभी वफा देती है।।
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गुरवतों के दिन भी तुमने शिददत से निभाई यारी।
साथी, बेमुरौव्वत जहां में तुमको नहीं आती दुनियादारी।।


















