किसने सोंचा था
‘‘केसरिया’’
आतंक के नाम से जाना जाएगा।
‘‘सादा’’
की सच्चाई गांधी जी के साथ जाएगा।
‘‘हरियाली’’
के देश में किसान भूख से मर जाएगा।
और
कफन लूट लूट कर स्वीस बैंक भर जाएगा।
किसने सोंचा था
लोकतंत्र में
गांधीजी की राह चलने वाला मारा जाएगा।
आज भी भगत सिंह फंसी के फंदे पर चढ़़ जाएगा।
किसने सोंचा था
भाई भाई का रक्त बहायेगा।
देश के सियाशत दां आतंकियों के साथ जाएगा।
अपने ही देश में तिरंगा पराया हो जाएगा।
और हमारा देश
शान से
आजादी का जश्न मनाएगा।
जय हिंद।




















