मंगलवार, 8 मई 2012

हन्ता














आकर बैठ गया है

सिद्धांत
सांप की तरह
सिरहाने में
कुण्डली मार कर...

नागपास की तरह
जकड़ लिया है
अस्तित्व को..
और डंस रहा है
सबको
पर
हन्ता होने का एहसास
तक मुझे नहीं होता...

4 टिप्‍पणियां:

  1. वाह......................
    अनजाने ही.................??????

    सादर.

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  2. वाह बहुत खूब ...सुंदर पंक्तियों के लिए बधाई

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  3. हन्ता होने का एहसास
    तक मुझे नहीं होता... सही भी है

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