शनिवार, 19 मार्च 2011

बुरा न मानों होली है। -----मीडियाबाजों ने जब पी ली भंग ---


मीडियाबाजों ने जब पी ली भंग
तो हो  गई शुरू पोल खोलने की जंग।

एक ने कहा 
सबसे तेज है हम
तो दूसरे ने कहा
हां जी,
शातीराने में।

श्रीमान ने फरमाया
सच है तो दिखेगा
किसी ने उनको भी समझाया
भ्रष्टों के हाथ बिकेगा।

एक ने कहा  
आपकी बात आपके साथ करेगें।
दूसरे ने नहीं गया रहा
ऐन केन प्रकारेन
अपनी झेली भेगेंगें।

जी बालों ने कहा 
जरा सोंचों
बगलगीर ने कहा 
हां जी
पतन की प्राकाष्ठा के बाद अब कहां जाओगे।

उन्होने कहा कि हम लेकर आये है 
एक उम्मीद
दूसरे ने मारा
उसे भी तोड़ दिया।



7 टिप्‍पणियां:

  1. सटीक अभिव्यक्ति. आभार.

    नेह और अपनेपन के
    इंद्रधनुषी रंगों से सजी होली
    उमंग और उल्लास का गुलाल
    हमारे जीवनों मे उंडेल दे.

    आप को सपरिवार होली की ढेरों शुभकामनाएं.
    सादर
    डोरोथी.

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  2. सटीक व्यंग । सबने एक दुसरे की पोल खोल दी।

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  3. पतन की प्राकाष्ठा के बाद अब कहां जाओगे।
    katu satya

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