बुधवार, 23 मार्च 2011

सोंचों ? ------23 मार्च शहादत दिवस पर शहीदों को नमन करती मेरी रचना। एक श्रद्धांजली।



सोंचो 
सरफरोशी की तमन्ना
अब किसके दिल में है?

कौन देखेगा 
जोर कितना बाजुए कातिल में है?

नेजे पर रख कर सर को अब
कौन बुलंद करेगा?

जिस देश की  खातिर
भगत सिंह
राजगुरू
सुखदेव ने 
फांसी को चूमा

सोंचो 

उस देश की  खातिर अब कौन मरेगा?




5 टिप्‍पणियां:

  1. अरब देशों में बाजुओं का ज़ोर दिख रहा है। हमारी नींद न जाने कब खुलेगी।

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  2. बहुत सुन्दर अभिब्यक्ति| धन्यवाद|

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  3. कोई चाहे कितना भी जातन कर ले लेकिन ... भारत माता पर कोई आंच नहीं आने देंगे ..माना की विषमताए है लेकिन .असंभव कुछ नहीं है

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