गुरुवार, 16 जनवरी 2014

नाप देता है आदमी



नाप देता है आदमी
जरा सा हंस-बोल 
क्या लिया
नाप देता है आदमी
औरत का पूरा देह
वामन की तरह...

औरत की देह
की चौहद्दी
उसकी गोलाई
से लेकर
चौड़ाई तक
सब कुछ
एक नजर में...

नहीं नाप पाता है
आदमी
ताउम्र
औरत की गहराई...

3 टिप्‍पणियां:

  1. वाह !

    नापने में लगा हुआ दरजी हो जाता है
    ताउम्र कुछ भी नहीं नाप पाता है
    आदमी को नापने की जरूरत नहीं होती
    नापना शुरु करते ही आदमी कहाँ रह जाता है :)

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  2. आपकी लेखनी से निकल हर शब्द नये अर्थों को जीने लगता है

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