रविवार, 14 अगस्त 2011

यह है दर्द में डूबी हुई हंसी।



यह तस्वीर मैंने अपने गांव के मुहसर टोली से खींची है,
इस बच्चे को देख कर बरबस ही मुंह से निकल गया...

मैंने भी माथे पर लगाया है तिरंगा,
भले ही हूं मैं भूखा नंगा।
मेरे चेहरे पर भी देख
लो आजादी की खुशी,
देखो औ देश के रहनुमाओं
यह है दर्द में डूबी हुई हंसी।

3 टिप्‍पणियां:

  1. स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं

    भारत की असलियत दिखाती फोटो...

    नीरज

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  2. मर्मस्पर्शी चित्र एवं रचना. आभार. स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...
    सादर,
    डोरोथी.

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