शुक्रवार, 17 जून 2011

गांधी जी के तीन बंदर


अब तो सत्याग्रह भी जुर्म हो गया है देश में?
राजगद्दी पर राजा बैठा है बंदर के भेष में.।

मंत्री से संत्री तक सब बोले हिटलरवाणी,
बाबा और संतो पर चढ़ दौड़ती है सरकारी जवानी।
बड़ा मजा आता है इनको करने क्लेश में....,
अब तो सत्याग्रह भी जुर्म हो गया है देश में?

गरीबी मिटाने का दावा इनका हो गया है पूरा,
घरती के बेटे का सपना धरा रह गया है अधूरा।
चार आना पुंजी है सौ लोगों की जेब में,
अब तो सत्याग्रह भी जुर्म हो गया है देश में?

गांधी जी के तीनों बंदर दिख जाएगें दिल्ली में,
लोकतंत्र को उड़ा रहें है हंस कर ये खिल्ली में।
सत्याग्रह,
न देखो,
न बोलो,
न सुनो,
राजा का फरमान टंग गया है सभी प्रदेश में
अब तो सत्याग्रह भी जुर्म हो गया है देश में?

3 टिप्‍पणियां:

  1. देश की व्यथा का सजीव चित्रण किया है इस रचना में ...

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  2. सत्याग्रहियों की संख्या बढ़े तो सफलता सुनिश्चित।

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