गुरुवार, 19 मार्च 2015

बसंत.....




बसंत

***
झड़ झड़
पतझड़
हमें बताता है,
जीवन सुख
और दुःख है
हमें सिखाता है...

आज है
पतझड़ तो
कल बसंत आएगा,
झड़ झड़
झड़ते पत्ते
यही जताता है....

(तस्वीर और कविता दोनों साथी की)

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (21-03-2015) को "नूतनसम्वत्सर आया है" (चर्चा - 1924) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    भारतीय नववर्ष की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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