मंगलवार, 27 मार्च 2012

प्रेम-काव्य


प्रेम की कविता केवल वही नहीं लिखते 
जिन्होंने प्यार किया
या कि प्यार में धोखा पाया।

प्रेम की कविता वे भी लिखते हैं
जिन्होंने कभी प्रेम की चाहत की 
पर इजहार न कर सके।

प्रेम काव्य तो उनका भी होता है
जिनका पहला प्रेम पत्र
आज भी 
किताब की कब्र में 
चिरनिद्रा में सो रहा होता है।

प्रेम काव्य वे भी लिखते है
जो शब्दों के मोती के साथ
प्रियतम तक पहुंचाते है दिल की बात।

और प्रेम काव्य लिखते हुए
आज भी मिल जायेगी 
कई मीरा------


9 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर भाव....

    टंकण त्रुटि ठीक कर लें
    आज भी "मिल जायेंगी"...

    शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  2. प्रेम वे भी लिखते हैं जो ख्यालों में प्रेम को जीते हैं .... कोई नाम नहीं , चेहरा नहीं - पर प्रेम होता है

    उत्तर देंहटाएं
  3. प्रेम काव्य तो उनका भी होता है
    जिनका पहला प्रेम पत्र
    आज भी
    किताब की कब्र में
    चिरनिद्रा में सो रहा होता है.....bahut khoobsurat.neeche ki pangti men lagta hai mil ke badle mal ho gaya hai......anytha n len.

    उत्तर देंहटाएं
  4. धन्यवाद, हड़बड़ में गड़बड़। काम का बोझ और ब्लॉगिंग...

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत खूब .. सच कहा है अरुण जी ... कई बार प्रेम ह्रदय में बंद रहता है ... अभिव्यक्ति नहीं हो पारी पर प्रेम तो रहता ही है ...

    उत्तर देंहटाएं
  6. अद्भुत निरीक्षण-परीक्षण और सुन्दर कविता !

    उत्तर देंहटाएं
  7. सच कहा प्रेम की कविता वही नहीं लिखते जिनहोने प्रेम किया हो .... बहुत कुछ मन में छिपी भावना भी होती है जो कल्पना में उतार लिखवा देती है प्रेम कविता ॥

    उत्तर देंहटाएं
  8. सच कहा जरूरी नही प्रेम करने वाले ही लिखें प्रेम कविता

    उत्तर देंहटाएं
  9. और प्रेम काव्य लिखते हुए
    आज भी मिल जायेगी
    कई मीरा------
    a..और कई तो अपने प्रेम को लिख ही नहीं पाती ..
    अजब-गजब है यह प्रेम..
    सुन्दर प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं