गुरुवार, 9 सितंबर 2010

जरूरी तो नहीं।




जरूरी तो नहीं।

हर ख्वाब की तामीर हो,
जरूरी तो नहीं।
हर शक्स की अच्छी तकदीर हो,
जरूरी तो नहीं।

माना कि मदहोश कर देती हो तुम शाकी,
बहक जाय हर शख्स,
जरूरी तो नहीं।

बहुत हसीन शोहबतें तेरी हमदम,
हासील हो सभी को ,
जरूरी तो नहीं।

सच है, तेरे चाहने वाले हैं कई,
बन जाओ सभी की ,
जरूरी तो नहीं।

तेरा आइना तुझे जी भर के देखता होगा,
हर सय की आइने सी तकदीर हो,
जरूरी तो नहीं।

कोई तो तेरे ख्वाब में आता होगा,
मुझे भी तुम बुलाओं,
जरूरी तो नहीं।

चाहा है मैंने तुझे जानो दिल से बढ़कर,
तुम भी मुझे चाहो,
जरूरी तो नहीं।

7 टिप्‍पणियां:

  1. वाह बहुत खूबसूरत प्रस्तुति।

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  2. तेरा आइना तुझे जी भर के देखता होगा,
    हर सय की आइने सी तकदीर हो,
    जरूरी तो नहीं।
    बेहतरीन भाव !
    शुभकामनाएँ!

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  3. वाह ..! अंतिम पंक्तियों का तो जवाब ही नहीं..
    kalamdaan.blogspot.com

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  4. चाहा है मैंने तुझे जानो दिल से बढ़कर,
    तुम भी मुझे चाहो,
    जरूरी तो नहीं।
    गहरे भाव लिये बेहतरीन प्रस्तुती है
    अच्छा लगा आपके ब्लॉग पर आकार .
    mauryareena.blogspot.com

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