1
साहेब,
आयातित चीतों को लाने में,
करोड़ों बहाते हैं।
जहाज सजाते हैं।
दिखावा करवाते हैं।
जनता की गाढ़ी कमाई को,
हवा में उड़ उड़ाते हैं..!
गोदी में बैठने वाले,
गुणगान भी गाते है।
नहीं अघाते है।
2
साहेब,
लोक कल्याणकारी वाले
लोक के तंत्र के राजा को
निम्मक चटा कर
मुफ्त खोर भी बताते हैं..!!