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गुरुवार, 6 मार्च 2014

जास्ती केजरीवाल बनने का नै......

जन्नत गुजरात में है, मान लो,
फालतू में सान-पट्टी करने का नै।

मार-कुटाई होगी,
ऑफिस पे चढ़ने का नै।

67 साल से लूट, बांट खा रहे,
59 दिन में भागने का नै।

जमाना बदल गया, तुम भी बदलो,
"चिल्लर" के डर से लंगोटी बांधने का नै।

पोल्टिक्स करनी हो तो
धर्म, जाति, वंश
सत्ता, कुर्सी, नेता
कॉरपोरेट, भ्रष्टाचार
का पैर पूजो,

जास्ती केजरीवाल बनने का नै.....
जास्ती केजरीवाल बनने का नै.....

रविवार, 2 अक्टूबर 2011

शब्दों की चुहलबाजी (क्षणिकाऐं)



1
गांधी जी से लेकर
इबादत की टोपी तक,
सबकुछ बांट देगें।
राजनीति के चतुरसुजान,
खून को भी सेकुलर कह छांट देगें!



2
मेरी आदतों का वे बुरा मान गए हैं,
मंदिर, मस्जिद भी जाता हूं, वे जान गए हैं।

3
चोर चोर मौसेरे भाई।
भाजपा ने उक्ती को चरितार्थ किया,
मंहगाई पर वोटिंग में आम आदमी को छोड़,
संसद में कांग्रेस का साथ दिया।

4
बाबा जी कहते थे
सर्वशक्तिमान है हम,
कांग्रेस के एक ही फटके में,
न खुदा मिला, न विशाले सनम...।

5
हाइटेक युग में महोदय
कथित रथ की सवारी करेगें,
जनता को भ्रमाने का
फिर से एक स्वांग धरेगें।

शनिवार, 19 मार्च 2011

बुरा न मानों होली है। -----मीडियाबाजों ने जब पी ली भंग ---


मीडियाबाजों ने जब पी ली भंग
तो हो  गई शुरू पोल खोलने की जंग।

एक ने कहा 
सबसे तेज है हम
तो दूसरे ने कहा
हां जी,
शातीराने में।

श्रीमान ने फरमाया
सच है तो दिखेगा
किसी ने उनको भी समझाया
भ्रष्टों के हाथ बिकेगा।

एक ने कहा  
आपकी बात आपके साथ करेगें।
दूसरे ने नहीं गया रहा
ऐन केन प्रकारेन
अपनी झेली भेगेंगें।

जी बालों ने कहा 
जरा सोंचों
बगलगीर ने कहा 
हां जी
पतन की प्राकाष्ठा के बाद अब कहां जाओगे।

उन्होने कहा कि हम लेकर आये है 
एक उम्मीद
दूसरे ने मारा
उसे भी तोड़ दिया।



बुधवार, 16 मार्च 2011

ब्लॉगरिया




ब्लॉगिंग करने की बिमारी, 
संक्रामक है बड़ी भारी।

जिसको होता इसका इंफेक्शन,
काम नहीं आता कोई इंजेक्शन।

बड़ा खतरनाक है इसका संक्रमण,
यार दोस्त पर करता अतिक्रमण।

कितने ही लोग इससे ग्रस्त है,
घर-बाहर सभी इससे त्रस्त है।

जिसको लगा रोग वह अपने में मस्त है,
रात दिन ब्लॉगिंग करने में व्यस्त है।

कॉमेंट के लिए दिन भर रिफ्रेश करता है,
बिना पढ़े ही दूसरों कें ब्लॉग पर कॉमेंट करता है।

ब्लॉगर की बीबी बेचारी,
साथ निभाना लाचारी।

ब्लॉगर पति जरा भी करता नहीं है प्रेम,
पत्नी, फिट हो जाय कोई थीम है ऐसा फ्रेम।

पत्नी यदि पतिब्रता नहीं होती,
कब की भाग गई होती।

यह रोगे कभी भी, कहीं भी किसी को भी लग सकता है,
इस लिए बंधू कोई उपाय सोंचिए,
एड्स का नहीं, ब्लॉगिंग का टीका खोजिए...




चित्र गूगल देवता से साभार 






रविवार, 13 फ़रवरी 2011

हार्ट हॉस्पीटल।




किस्सा कुछ समझ न पाया,
एक होडिंग जब नजर में आया।

पढ़कर कुछ मन घबराया,
आगे पढ़ने को उकसाया।

लिखा था..
नये वॉल्व लगाये,
या पुराना वॉल्व
रिपेयर करायें।

छः माह की गारंटी देशी में,
तीन साल की गारंटी विदेशी में।

सोंचा मैंने
गाड़ियों का गैराज 
खुबसुरत है कितना,
शब्दों में मुश्किल है उसको लिखना।

फिर मोटे हरफों पर नजर गई,
पांव वहीं पर ठहर गये.

लिखा था

‘‘जीवक हार्ट हॉस्पीटल’’

यहां है
सरकारी कर्मचारियों, नेताओं के लिए है
व्यवस्था विशेष,
समझने को रह गया फिर कुछ शेष।

क्या नेता-अधिकारियों के वॉल्व होते है
जल्दी खराब,
तभी तो है यह निर्देश, 
उनके लिए व्यवस्था विशेष।

समझ गया तब मैं एक बात,
ये लोग होते है क्यों संगदिल,
क्योंकि कृत्रिम होतें है इनके दिल।

होते हैं ये बड़े हार्ड,
क्यांेकि 
नकली होता है इनका हार्ट।

शनिवार, 1 जनवरी 2011

तलाक (चुटकी)


पत्नी पीड़ित पति ने 

तलाक का खर्चा पूछा

वकील साहब ने कहा एक हजार

भड़ककर पति महोदय ने कहा 

वाह सरकार

शादी में पंडित ने खर्च कराये

कुल रूपये चार

तलाक में आप लेगें एक हजार।

वकील ने तपाक से कहा

बिल्कुल सही कह रहे हो

और

सस्ते काम का परिणाम ही 

तो सह रहे हो।