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बुधवार, 8 अगस्त 2018

अंधेरा

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चलो फिर से आंधियों को हवा देते है, चलो हर एक चरागों को बुझा देते है!! ये रौशनी ही फसाद करती है "साथी", चलो इस गांव में अंधेरे क...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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