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शनिवार, 26 जुलाई 2025

प्रेम और परछाई

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 प्रेम और परछाई अरुण साथी उसने कहा — अब घटता जा रहा है तुम्हारा प्रेम, वैसे ही जैसे दोपहरी को बढ़ाते सूरज के साथ-साथ घटती जाती है परछाई। मैं...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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