साथी
hindi kavita
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
hindi kavita
लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं.
सभी संदेश दिखाएं
शनिवार, 26 जुलाई 2025
प्रेम और परछाई
›
प्रेम और परछाई अरुण साथी उसने कहा — अब घटता जा रहा है तुम्हारा प्रेम, वैसे ही जैसे दोपहरी को बढ़ाते सूरज के साथ-साथ घटती जाती है परछाई। मैं...
2 टिप्पणियां:
›
मुख्यपृष्ठ
वेब वर्शन देखें