गुरुवार, 8 सितंबर 2016
तूती की आवाज
बुधवार, 3 अगस्त 2016
धुंधले रिश्ते
जिंदगी अब कहाँ किसी
सिरहाने टिकती है।
हर एक रिश्तों की अब
धुंधली सी तस्वीर दिखती है।।
◆कोई होकर भी अपना,
कभी अपना न हुआ।
किसी की जिंदगी गैरों
की खातिर ही बिकती है।।
◆जाने क्या रिश्ता है
अपना उनसे।
वो पगली मुझे देख कर
बेवजह हंसती है।।
◆देखा है अलग अलग
चेहरे रिश्तों के यहाँ,
सुना है रिश्ते भी अब
ब्यूटी पार्लरों में सजती है।।
शनिवार, 23 जुलाई 2016
आईये यूँ नागपंचमी मनाते है..
आईये यूँ नागपंचमी मनाते है..
*अरुण साथी*
कुछ तथाकथित
दोस्तों को
आदर सहित
घर बुलाते है
और उनको
भरपेट दूध पिलाते है..
**
आईये यूँ
नागपंचमी मनाते है..
**
कुछ तथाकथित
सेकुलरों के घर जाते है
और उनको दूध पिलाकर
आस्तीन का सांप
होने का अर्थ समझाते है..
**
आईये यूँ
नागपंचमी मनाते है...
**
कुछ तथाकथित राष्ट्रवादी
भक्तों को दूध सुँघाते है
उनको उकसाते है
और फिर
उनकी जिह्वा से निकली
गलीज गालियों के बीच
कालिया नाग और
उनके बीच की समानता का
अर्थ उन्हें समझाते है...
**
आईये यूँ
नागपंचमी मनाते है..
**
कुछ तथाकथित
मुल्लों-मौलवियों
पण्डे-पुरोहितों
जकीरों-ओवैसियों
साध्वियों-योगियों
को धर लाते है
उनके बिष के
दाँत तोड़कर
उन्हें देशभक्ति का
पाठ पढ़ाते है..
**
आईये यूँ,
नागपंचमी मनाते है...
मंगलवार, 12 जुलाई 2016
छिछियैनी दुर्गन्ध
छिछियैनी दुर्गन्ध
(अरुण साथी)
बोन चाइना की
कशीदाकारी प्लेट में
जब गोश्त का टुकड़ा डाला
तो अजीब सी छिछियैनी
दुर्गन्ध आई...
पांच सितारा भव्यता
लेज़र लाइटिंग की चकाचौंध
ह्रदय गति को
स्तंभित करती
डीजे की धूम-धड़ाक में भी
यह छिछियैनी सी दुर्गन्ध
जानी पहचानी सी लगी..
ओह,
यह तो वही छिछियैनी सी दुर्गन्ध है
जो आज ही अस्पताल में पड़ी
दहेज़ के लिए जली
एक बेटी की
देह से आ रही थी..
ओह, ओह, ओह
बुधवार, 15 जून 2016
अभी हारा नहीं हूँ मैं...
नहीं
अभी हारा नहीं हूँ मैं..
गिरा भर हूँ
मुँह के बल ही सही
गिर जाना
हारना नहीं होता..
फिर उठ कर चलूँगा
एक एक कदम ही सही
मंजिल की ओर
जीतने के लिए
और
जबतक
जीतने का जुनून बाकि है
हारा हुआ मत समझना मुझे
सुना की नहीं
सुन तो लो सही
हारा हुआ मत समझना..
गुरुवार, 26 मई 2016
साथी के बकलोल वचन
😶😶😶
बिहार में आईलो ई कइसन विहान,
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान !
कहिनो मर्डर, कहिनो किडनैप,
कहिनो रंगदारी त कहिनो हुड़दंग।
कजै नै हे सुरक्षा, घर कि दालान,
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान !
कहिनो मरे पत्रकार अ कहिनो व्यपारी,
गुंडागर्दी करे हे अदमी सरकारी।
एमएलए करे रेप औ चले सीना तान।
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान!
आम अदमी के त जहाँ तहाँ बम से उड़ाबे हे,
पुरनका सीएम के गाड़ियों जराबे हे।
कैसु बेचारा मांझी बचैलका अपन जान।
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान!
साथी के बकलोल वचन
😶😶😶
बिहार में आईलो ई कइसन विहान,
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान !
कहिनो मर्डर, कहिनो किडनैप,
कहिनो रंगदारी त कहिनो हुड़दंग।
कजै नै हे सुरक्षा, घर कि दालान,
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान !
कहिनो मरे पत्रकार अ कहिनो व्यपारी,
गुंडागर्दी करे हे अदमी सरकारी।
एमएलए करे रेप औ चले सीना तान।
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान!
आम अदमी के त जहाँ तहाँ बम से उड़ाबे हे,
पुरनका सीएम के गाड़ियों जराबे हे।
कैसु बेचारा मांझी बचैलका अपन जान।
लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान!
बुधवार, 30 मार्च 2016
मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ, हाँ मैं भूख से नहीं मरा..
मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ, हाँ मैं भूख से नहीं मरा..
(अरुण साथी)
हाँ मैं जागो मांझी ही बोल रहा हूँ
गलत है कि मैं मर गया हूँ
मैं मर कैसे सकता हूँ
मैं तो बोल ही रहा हूँ
कि मैं भूखा हूँ
मुझे रोटी दो
पर सुनेगा कौन?
इस कब्रिस्तान में?
समूचा शहर ये कब्रिस्तान है
जिसमे रहते है साँस लेते
चलते, बोलते लोग
और इसी कब्रिस्तान का राजा
को मेरे भूखे होने की आवाज
नागवार लगी है
इसी लिए उन्होंने
मेरे शारीर को
चिड़फाड़ कर
यह साबित किया
कि मैं भूखा नहीं हूँ
हे महाराज
मैं अकेला नहीं
बोल रहा हूँ
लाखों है बोलने वाले
कि मुझको ही मेरे हिस्से का
राशन नहीं मिलता,
हे महाराज
मेरे जैसों की क्रंदन को
सुनो तो,
और सुनो तो
कि मरने के बाद भी
जागो मांझी क्या बोल रहा है..
हाँ मैं भूख से नहीं मरा,
मैं तो मरा हूँ
इस व्यवस्था कि
अकर्मण्यता से
निर्लज्जता से
संवेदनहीनता से
मैं तो मरा हूँ
छीन लिए गए
मेरे हिस्से के
उन
निवाले कि वजह से
जो
नोटों की शक्ल में
तुम्हरी तिजोरी में बंद है
सुनो तो सही
मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ...
(भूख से मरे जागो मांझी की खबर करने के बाद)
सोमवार, 21 मार्च 2016
उल्टी करता आदमी.
उल्टी करता आदमी..
पता नहीं क्यों
दूसरों की वनिस्पत
कुछ आदमी में बड़ी कमी होती?
दूसरे
हजम कर जाते है
बहुत कुछ
कई तो सबकुछ
जैसे वो
आदमी नहीं
तिलचट्टा हो
सर्वाहारी...
कुछ
उल्टी कर देते हैं
हज़म नहीं कर सकते
सबकुछ
जैसे कि
सामाजिक बिसंगति
धार्मिक थोथापन
जातिय उन्माद
और कर देते है उल्टी
कहीं किसी समाज में
कहीं किसी देश में
कहीं किसी सोशल मीडिया में...
सच है
उल्टी करने वालों को भला
कौन पसंद करेगा
फिर भी
कुछ लोग है उल्टी
करनेवाले
तभी बची है दुनिया..
शनिवार, 6 फ़रवरी 2016
रोज डे पे साथी के बकलोल वचन
रोज डे पे साथी के बकलोल वचन(अरुण साथी)
🌹🌹🌹
रोज डे पे श्रीमती जी को
जब गुलाब दिया
तो उसके चेहरे पे
प्रेम का भाव नहीं पाया,
मैं अत्यधिक घबराया,
मन में संशय आया,
कहीं किसी ने
मुझसे पहले तो
गुलाब नहीं थमाया!
🌹🌹🌹
पूछा,
"प्रिय, अपनी शादी के
सिल्वर जुबली बर्ष पे भी
मैंने तुम्हें ही गुलाब थमाया,
फिर तुमने
मेरे रगो के खौलते लहू में
अपनी शीतलता का
भाव क्यों मिलाया?"
😡😡😡
श्रीमती जी और भड़क गयी,
"कलमुहें,
क्या मैं तुम्हें
जानती नहीं?
जरूर यह गुलाब किसी
कलमुंही के लिए ख़रीदा होगा,
मेरे लिए तो आज तक
एक बिंदी भी नहीं लाया....!
जानता नहीं कि
बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता।
तुम गधे मर्द तो
सुहागरात के अंधे होते हो,
तुम्हें हमेशा दूसरी
तरफ की सूखी घांस भी
हरी हरी
नजर है आती है,
दूसरी वाली जरलाही भी
मन को भाती है,
अपनी बीबी तो
हर बात पे काट खाती है..।
मैं तो अवाक रह
सोचने लगा,
बीबी और मोदी जी में
कितनी समानता है,
एक "मन की बात" करते है,
एक "मन की बात" पकड़ती है..।
मोदी भी अकड़ते है,
बीबी भी अकड़ती है...।।।
शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016
रविवार, 31 जनवरी 2016
गुरुवार, 21 जनवरी 2016
बिहार में बहार हो!!
बिहार में बहार हो!!
बिहार में आईलो ई कईसन बहार हो?
जन्ने देखहो ओन्ने गोलिये के बौछार हो!!
अपहरण के चकाचक चललो रोजगार हो!!
बिहार में आईलो ई कईसन बहार हो?
अदमि के जान जैसे गजरा-मुराय हो..!!
बिहार में आईलो ई कईसन बहार हो?
बैंक डकैती तो जैसे पर डे के कारोबार हो!
बिहार में आईलो ई कईसन बहार हो?
बड़का भाय; सपरिवार, सिरोरे मलाय हो!!
बिहार में आईलो ई कईसन बहार हो?
सोमवार, 18 जनवरी 2016
साथी के बकलोल वचन (जंगलराज आयो)
कुख्यात पति मंडल को
एमएलए पत्नी भारती
ने थाने से छुड़ायो,
😡😡😜
थानेदार को
कान के नीचे दो बजायो,
👋🏿👋🏿👋🏿
फिर समझायो,
🐶🐶🐶
पता नहीं तोको,
बिहार में जंगलराज आयो..
🐯🐯🐯
#साथी के #बकलोल_वचन
मंगलवार, 10 नवंबर 2015
बुधवार, 9 सितंबर 2015
गुरुवार, 3 सितंबर 2015
फगुनिया
रे फगुनिया
ठन ठन, ठनाक
यह छेनी
हथौड़ी
की आवाज़ नहीं है रेयह प्रेमी की
हाँक है
हनक है
सनक है
यह तुझे
स्वर्ग में भी सुनाई देगी
प्रेम की ताकत है यह रे
पहाड़ का छाती तोड़ दिया इसने
और हमेशा की ही तरह
चूर चूर कर दिया
अहँकार का सीना...
देख तो
यह शहंशाह का
ताजमहल नहीं है रे
यह गरीब का प्रेम है
निर्मल प्रेम
गहलौर घाटी के हर पत्थर पे
तेरा नाम गुदा है रे
रे फगुनिया..
सुन रही है रे
सुन तो
रविवार, 23 अगस्त 2015
गुरुवार, 16 जुलाई 2015
अपनी लाश को ढोना...

(अपनी वेदना को शब्द दी है, बस...)
पहाड़ सी जिंदगी
का बोझ पीड़ादायी होता है..
उससे अधिक
पीड़ादायी हो जाता है
किसी अपने का
पहाड़ सा
दिया हुआ दुख....
और जब
आदमी
अपनी ही लाश को
ढोते हुए जीने लगता है,
तब
उस असाह्य
पीड़ा के प्रति भी
वह संवेदनहीन सा हो जाता है!
जाने क्यूं...?
(चित्र- गूगल देवता से उधार लिया हुआ)
सोमवार, 6 जुलाई 2015
शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015
"साथी" ने अर्ज़ किया है..
ऐ मोहब्बत, उनको भी मेरी प्यास दे दे ।।
***
उनकी बेवफाई का कहीं शिकवा न करूँ ।
अपनी मोहब्बत को कहीं रुस्बा न करूँ ।।
ऐसी इल्म कोई खास दे दे ।।
ऐ मोहब्बत, उनको भी मेरी प्यास दे दे ।।
***
शकून से ही जिंदगी गुजर नहीं होती ।
गम के बगैर जिंदगी मुख़्तसर नहीं होती ।।
मेरे महबूब को ये थोड़ी सी जज्बात दे दे ।
ऐ मोहब्बत, उनको भी मेरी प्यास दे दे ।।
***
जिस्म तो बाजारू है, सिक्कों पे बिका करती है ।
हुश्न का टूटता गरूर कोठो पे दिखा करती है ।।
मेरी सदा रूह तक पहुंचे, ऐसी कोई हालात दे दे ।
ऐ मोहब्बत, उनको भी मेरी प्यास दे दे ।।
***
सोमवार, 30 मार्च 2015
गांव और मैट्रो की जिन्दगी...
थोड़ी सा फर्क होता है
बेमौसम बारिस
और ओला गिरने पर
सोशल मीडिया पे
मैट्रोवासी
और
एफएम पे आरजे
चुहल करते हुए
खुशनुमा मौसम के
कसीदे गढ़ते हैं.....
पर गांव में
बर्बाद हुए खेत को देख
किसान
आत्महत्या करते हैं.....!!
(एफएम रेडियो पर अभी अभी आरजे की चुहल को देखते हुए यह मेरी संवेदना के शब्द है, यदि किसी आरजे तक मेरी संवेदना पहूंचे तो प्लीज इसे प्रसारित करने का साहस करेगें....यह किसान का दर्द है जिसके खून पसीने की रोटी आप भी खाते है.....अरूण साथी, बरबीघा, बिहार...और शेयर करने वालों मित्रों से अनुरोध होगा कि साभार में मेरा नाम देने का कष्ट करें....)
रविवार, 22 मार्च 2015
"साथी" के बकलोल वचन / (बिहार के हालात पे मगही कविता)
गुरुवार, 19 मार्च 2015
बुधवार, 4 मार्च 2015
जोगीरा सा रा रा रा / बुरा मानो होली है
आडानी के गले लगाबे, किसान पेट पकड़ डिरराय...।।
जोगीरा सा रा रा रा.. जोगीरा सा रा रा रा..
***
रे अरविन्दबा, रे जरलहबा, तोहूं लेगें उमताय।
सभ्भे नियर बुढ़-बुजुर्ग के घर से देले भगाय..।।
जोगीरा सा रा रा रा.. जोगीरा सा रा रा रा..
***
नीतीश भैया सुशासन के तोहूं देला भुलाय।
मोदी मोदी करो ह खाली, तोहूं गेला ललुआय....।।
जोगीरा सा रा रा रा.. जोगीरा सा रा रा रा..
***
राहुल बउआ, बउआ, सब मिल रहे मनाय।
पीएम कुर्सी लाकर दे दो, बउआ भागल जाय..।।
जोगीरा सा रा रा रा.. जोगीरा सा रा रा रा....










