साथी

रविवार, 26 नवंबर 2017

केजरू

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केजरू भैया भज-पा के तुलना आईएसआई कर देलखुन! मने की गुणवत्तापूर्ण प्रोडक्ट के सर्टिफिकेट लगले धर देलखुन..!! #साथी के #बकलोल_वचन
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सोमवार, 20 नवंबर 2017

साथी

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साथी ठोकरें खाकर अपनों की जब से संभल गए साथी! दुनियादार क्या हुआ, कहते हैं बदल गए "साथी"!! जिनसे था ग़ुरूर वही लोग मतलबी निकल...
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शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

रावण

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प्रकांड विद्वान सिद्ध तपस्वी शिव भक्त ब्रह्मा वंशज स्वप्नद्रष्टा अजर-अमर होकर भी वह नायक नहीं कहलाता है, एक अहँकार से हर कोई रावण ...
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बुधवार, 23 अगस्त 2017

कौरव कौन, पांडव कौन...

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कौरव कौन, कौन पांडव (कविता) *अटल बिहारी वाजपेयी* कौरव कौन कौन पांडव, टेढ़ा सवाल है। दोनों ओर शकुनि का फैला कूटजाल है। धर्मराज ने छोड...
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रविवार, 28 मई 2017

कमी बाकी रख..

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एक मुसलसल सी कमी बाकी रख! पावों तले थोड़ी सी जमीं बाकी रख!! ठोकरों से संभलना सीख ले "साथी"! आंखों में थोड़ी सी नमी बाकी रख!! महब...
शनिवार, 20 मई 2017

मोहब्बत पे यकीं

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एक मुसलसल सी कमी बाकी रख! पावों तले थोड़ी सी जमीं बाकी रख!! ठोकरों से संभलना सीख ले "साथी"! आंखों में थोड़ी सी नमी बाकी रख!! महब...
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बुधवार, 19 अप्रैल 2017

अफ़ीम

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अफ़ीम ** भूख गरीबी बेरोजगारी अशिक्षा से बिलखते माँ भारती के बच्चों को वे बड़ी आसानी से सुला देते है, ** ये राजनेता जागने से पहले ही...
शनिवार, 15 अप्रैल 2017

साथी के बकलोल वचन

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दहेज प्रथा बाल विवाह जात-पात खतम करे के नीतीश जी के जगलो हें चाह, मने की, पोलटिक्स छोड़ साहेब पकड़ता अब सन्यास आश्रम के राह.. #साथी ...
शुक्रवार, 14 अप्रैल 2017

शगल

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जिंदगी का अजीब फ़लसफ़ा है, हर एक आदमी दूसरे से खफा है! गैरों के गुनाहों का बही-खाता है सबके पास, बस अपने गुनाहों का हिसाब रफा-दफा है! तौही...
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गुरुवार, 13 अप्रैल 2017

बिना पेंदी का लोटा

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जबसे कजरी बिना पेंदी का लोटा हुआ, तब से एक एक वोट का टोटा हुआ.. 2 उम्मीद टूटने बालों का लगा है श्राप, जमानत जप्ती का रिकॉर्ड बना रही...

परजीवी

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परजीवी **** यार-दोस्त भाई-बंधु समान होता है, और साथ रहकर आदमी खून चूस खोखला कर देता है.. साथी के बकलोल वचन 🙈&#12858...
सोमवार, 10 अप्रैल 2017

उपदेश

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जिनके हाथ खून से सने होते हैं, हाय !! वे भी गांधीवाद का उपदेश देते हैं!!
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मंगलवार, 4 अप्रैल 2017

हे राम

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हे राम अपने जीवन में राम के आदर्शों को रत्ती भर भी नहीं उतार रहे हैं, वैसे लोग भी चौक-चौराहे पर जय श्रीराम चिंघाड़ रहे हैं ... कैसा ...
सोमवार, 27 मार्च 2017

नया खुदा चुन लें..

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दुनिया की आबोहवा में जहर बहुत है, चलो अब मुठ्ठी भर ताजी हवा चुन लें!! मजहब तो नफ़रत बांटता है आजकल, चलो अब कोई नया खुदा चुन लें!! काम जिन...
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रविवार, 26 मार्च 2017

जख्मों का हिसाब मत रख..

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जिंदगी में जख्मों का हिसाब मत रख। गम के पन्ने हो, वैसी किताब मत रख।। बच्चों की तरह जीता चल जिंदगी। चेहरे पे कोई भी नकाब मत रख।। जिससे है...
शुक्रवार, 10 मार्च 2017

यूपी के बौराल होली

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यूपी के बौराल होली (अरुण साथी) यूपी वाला पे फगुआ के चढ़लो ऐसन उमंग, दबा दबा के ईवीएम के कैलक खूब हुड़दंग जोगीरा सारा रा रा... मोदी जी भ...
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मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

बंदरी का वेलेंटाइन विश

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(अरुण साथी) आंय जी, प्रेम विवाह के दो दशक हुए आपने मुझे कभी वेलेंटाइन विश नहीं किया..! मैंने कहा, बंदरी आजकल के लौंडे कई को विश करते...
मंगलवार, 31 जनवरी 2017

वजूद

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वजूद ** तेज ताप से खौल उठता है वजूद... और उधियाने लगता है तभी कोई अपना पानी का छींटा देकर संभल लेता है.. उधियाते वजूद को.. (तस्वी...
रविवार, 29 जनवरी 2017

मौत से पहले..

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मौत से पहले... बहुत भचर-भचर करते हो मार दिए जाओगे एक दिन उन्हीं लोगों की तरह.. लगी होगी एक-आध गोली पीठ में, सीने में या कनपट्टी के आस...
शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

साथी के बकलोल वचन

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"अहिंसा परमो धर्मः" कहने वाले गाँधी की तस्वीर खादी से मिटा दी.... हंगामा क्यों है बरपा जो उन्होंने अपनी फितरत बता दी.…. #साथ...
शनिवार, 31 दिसंबर 2016

महुआ महके..

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महुआ महके तोर अंगना में, सूरजमुखी खिल जाये। बेला, जूही, हरसिंगार सन, जीवन खुशबु  से भर जाये।। सरसों फूलो, मांजर महके, धान, गेहुम लहराये...
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सोमवार, 26 दिसंबर 2016

आम आदमी

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भागमभाग उठापटक कभी उधर कभी इधर सपने-हकीकत घर-परिवार दोस्ती-यारी देश-समाज दाल-रोटी की जद है जिंदगी.. ** घिसे चप्पल सिले जूते चिप...
बुधवार, 30 नवंबर 2016

विरहन..

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जब भी वह मिलती है हौले से मुस्कुरा, आहिस्ते से मचलती है! वैसे ही जैसे, सूरज की लाली से सूर्यमुखी खिलती है! वैसे ही जैसे, भौरे की ग...
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मंगलवार, 1 नवंबर 2016

झूठ की खेती

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झूठ की खेती (अरुण साथी) वह बंजर जमीन हो या कि हो मरूभूमि या हो पठार-पर्वत कुछ लोग बड़े कुशल उद्यमी होते है और वे बंजर जमीन पे भी झ...
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गुरुवार, 29 सितंबर 2016

परिवार

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परिवार ** माँ-बाबु जी का गलतियों पे डाँटना, उदासी का कारण पूछ दुःख बाँटना है। अच्छा लगता है.. 2 दोपहर को खाने का मिसकॉल आना, देर र...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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