साथी

सोमवार, 27 मार्च 2017

नया खुदा चुन लें..

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दुनिया की आबोहवा में जहर बहुत है, चलो अब मुठ्ठी भर ताजी हवा चुन लें!! मजहब तो नफ़रत बांटता है आजकल, चलो अब कोई नया खुदा चुन लें!! काम जिन...
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रविवार, 26 मार्च 2017

जख्मों का हिसाब मत रख..

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जिंदगी में जख्मों का हिसाब मत रख। गम के पन्ने हो, वैसी किताब मत रख।। बच्चों की तरह जीता चल जिंदगी। चेहरे पे कोई भी नकाब मत रख।। जिससे है...
शुक्रवार, 10 मार्च 2017

यूपी के बौराल होली

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यूपी के बौराल होली (अरुण साथी) यूपी वाला पे फगुआ के चढ़लो ऐसन उमंग, दबा दबा के ईवीएम के कैलक खूब हुड़दंग जोगीरा सारा रा रा... मोदी जी भ...
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मंगलवार, 14 फ़रवरी 2017

बंदरी का वेलेंटाइन विश

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(अरुण साथी) आंय जी, प्रेम विवाह के दो दशक हुए आपने मुझे कभी वेलेंटाइन विश नहीं किया..! मैंने कहा, बंदरी आजकल के लौंडे कई को विश करते...
मंगलवार, 31 जनवरी 2017

वजूद

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वजूद ** तेज ताप से खौल उठता है वजूद... और उधियाने लगता है तभी कोई अपना पानी का छींटा देकर संभल लेता है.. उधियाते वजूद को.. (तस्वी...
रविवार, 29 जनवरी 2017

मौत से पहले..

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मौत से पहले... बहुत भचर-भचर करते हो मार दिए जाओगे एक दिन उन्हीं लोगों की तरह.. लगी होगी एक-आध गोली पीठ में, सीने में या कनपट्टी के आस...
शुक्रवार, 13 जनवरी 2017

साथी के बकलोल वचन

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"अहिंसा परमो धर्मः" कहने वाले गाँधी की तस्वीर खादी से मिटा दी.... हंगामा क्यों है बरपा जो उन्होंने अपनी फितरत बता दी.…. #साथ...
शनिवार, 31 दिसंबर 2016

महुआ महके..

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महुआ महके तोर अंगना में, सूरजमुखी खिल जाये। बेला, जूही, हरसिंगार सन, जीवन खुशबु  से भर जाये।। सरसों फूलो, मांजर महके, धान, गेहुम लहराये...
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सोमवार, 26 दिसंबर 2016

आम आदमी

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भागमभाग उठापटक कभी उधर कभी इधर सपने-हकीकत घर-परिवार दोस्ती-यारी देश-समाज दाल-रोटी की जद है जिंदगी.. ** घिसे चप्पल सिले जूते चिप...
बुधवार, 30 नवंबर 2016

विरहन..

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जब भी वह मिलती है हौले से मुस्कुरा, आहिस्ते से मचलती है! वैसे ही जैसे, सूरज की लाली से सूर्यमुखी खिलती है! वैसे ही जैसे, भौरे की ग...
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मंगलवार, 1 नवंबर 2016

झूठ की खेती

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झूठ की खेती (अरुण साथी) वह बंजर जमीन हो या कि हो मरूभूमि या हो पठार-पर्वत कुछ लोग बड़े कुशल उद्यमी होते है और वे बंजर जमीन पे भी झ...
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गुरुवार, 29 सितंबर 2016

परिवार

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परिवार ** माँ-बाबु जी का गलतियों पे डाँटना, उदासी का कारण पूछ दुःख बाँटना है। अच्छा लगता है.. 2 दोपहर को खाने का मिसकॉल आना, देर र...
मंगलवार, 27 सितंबर 2016

दासी लोकतंत्र

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दासी लोकतंत्र ** साथी उवाच "क्यों जनतंत्र में मालिक जनता भूखी और प्यासी है? राजा के घर क्रंदन क्यों है? क्यों मुख पे छाई उदास...
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शनिवार, 17 सितंबर 2016

भूख और माँ

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भूख और माँ (सोशल मीडिया पे वायरल इस तस्वीर को देखकर साथी के शब्द.. निःशब्द..) ** जिंदगी है मौत है और है मौत से भी भयावह क्रूर बर्बर...
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बुधवार, 14 सितंबर 2016

भक्त

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"भक्त" ** "अच्छे दिन" और "काला धन" को जुमला कहे जाने पर भी जो आसक्त रहते है, हे तात कली काल में उसे ...
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रविवार, 11 सितंबर 2016

प्रहसन

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यह एक प्रहसन है लोकतंत्र का प्रहसन यहाँ लिखी गयी पटकथा पे अभिनय करते है लोग तभी तो वही लोग जो कल तक रावण को मानते थे राक्षस, आज अ...
गुरुवार, 8 सितंबर 2016

तूती की आवाज

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कातिल को कातिल कहो, रवायत नहीं है। फ़क़त मुर्दों से ज़माने को शिकायत नहीं है!! मुर्दों के शहर में रहकर भी शोर क्यों करते हो,...
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बुधवार, 3 अगस्त 2016

धुंधले रिश्ते

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जिंदगी अब कहाँ किसी सिरहाने टिकती है। हर एक रिश्तों की अब धुंधली सी तस्वीर दिखती है।। ◆कोई होकर भी अपना, कभी अपना न हुआ। किसी की जिंदग...
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शनिवार, 23 जुलाई 2016

आईये यूँ नागपंचमी मनाते है..

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आईये यूँ  नागपंचमी मनाते है.. *अरुण साथी* कुछ तथाकथित  दोस्तों को आदर सहित  घर बुलाते है और उनको भरपेट दूध पिलाते है.. ** आईये यू...
मंगलवार, 12 जुलाई 2016

छिछियैनी दुर्गन्ध

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छिछियैनी दुर्गन्ध  (अरुण साथी) बोन चाइना की कशीदाकारी प्लेट में जब गोश्त का टुकड़ा डाला तो अजीब सी छिछियैनी दुर्गन्ध आई... पांच सितारा भव्यता...
बुधवार, 15 जून 2016

अभी हारा नहीं हूँ मैं...

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नहीं अभी हारा नहीं हूँ मैं.. गिरा भर हूँ मुँह के बल ही सही गिर जाना हारना नहीं होता.. फिर उठ कर चलूँगा एक एक कदम ही सही मंजिल की ओर ...
गुरुवार, 26 मई 2016

साथी के बकलोल वचन

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साथी के बकलोल वचन 😶😶😶 बिहार में आईलो ई कइसन विहान, लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान ! कहिनो मर्डर, कहिनो किडनैप, कहिनो रंगदारी त कहिनो ह...

साथी के बकलोल वचन

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साथी के बकलोल वचन 😶😶😶 बिहार में आईलो ई कइसन विहान, लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान ! कहिनो मर्डर, कहिनो किडनैप, कहिनो रंगदारी त कहिनो ह...
बुधवार, 30 मार्च 2016

मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ, हाँ मैं भूख से नहीं मरा..

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मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ, हाँ मैं भूख से नहीं मरा.. (अरुण साथी) हाँ मैं जागो मांझी ही बोल रहा हूँ गलत है कि मैं मर गया हूँ मैं मर कैसे...
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सोमवार, 21 मार्च 2016

उल्टी करता आदमी.

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उल्टी करता आदमी.. पता नहीं क्यों दूसरों की वनिस्पत कुछ आदमी में बड़ी कमी होती? दूसरे हजम कर जाते है बहुत कुछ कई तो सबकुछ जैसे वो आदम...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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