साथी

बुधवार, 30 नवंबर 2016

विरहन..

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जब भी वह मिलती है हौले से मुस्कुरा, आहिस्ते से मचलती है! वैसे ही जैसे, सूरज की लाली से सूर्यमुखी खिलती है! वैसे ही जैसे, भौरे की ग...
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मंगलवार, 1 नवंबर 2016

झूठ की खेती

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झूठ की खेती (अरुण साथी) वह बंजर जमीन हो या कि हो मरूभूमि या हो पठार-पर्वत कुछ लोग बड़े कुशल उद्यमी होते है और वे बंजर जमीन पे भी झ...
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गुरुवार, 29 सितंबर 2016

परिवार

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परिवार ** माँ-बाबु जी का गलतियों पे डाँटना, उदासी का कारण पूछ दुःख बाँटना है। अच्छा लगता है.. 2 दोपहर को खाने का मिसकॉल आना, देर र...
मंगलवार, 27 सितंबर 2016

दासी लोकतंत्र

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दासी लोकतंत्र ** साथी उवाच "क्यों जनतंत्र में मालिक जनता भूखी और प्यासी है? राजा के घर क्रंदन क्यों है? क्यों मुख पे छाई उदास...
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शनिवार, 17 सितंबर 2016

भूख और माँ

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भूख और माँ (सोशल मीडिया पे वायरल इस तस्वीर को देखकर साथी के शब्द.. निःशब्द..) ** जिंदगी है मौत है और है मौत से भी भयावह क्रूर बर्बर...
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बुधवार, 14 सितंबर 2016

भक्त

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"भक्त" ** "अच्छे दिन" और "काला धन" को जुमला कहे जाने पर भी जो आसक्त रहते है, हे तात कली काल में उसे ...
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रविवार, 11 सितंबर 2016

प्रहसन

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यह एक प्रहसन है लोकतंत्र का प्रहसन यहाँ लिखी गयी पटकथा पे अभिनय करते है लोग तभी तो वही लोग जो कल तक रावण को मानते थे राक्षस, आज अ...
गुरुवार, 8 सितंबर 2016

तूती की आवाज

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कातिल को कातिल कहो, रवायत नहीं है। फ़क़त मुर्दों से ज़माने को शिकायत नहीं है!! मुर्दों के शहर में रहकर भी शोर क्यों करते हो,...
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बुधवार, 3 अगस्त 2016

धुंधले रिश्ते

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जिंदगी अब कहाँ किसी सिरहाने टिकती है। हर एक रिश्तों की अब धुंधली सी तस्वीर दिखती है।। ◆कोई होकर भी अपना, कभी अपना न हुआ। किसी की जिंदग...
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शनिवार, 23 जुलाई 2016

आईये यूँ नागपंचमी मनाते है..

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आईये यूँ  नागपंचमी मनाते है.. *अरुण साथी* कुछ तथाकथित  दोस्तों को आदर सहित  घर बुलाते है और उनको भरपेट दूध पिलाते है.. ** आईये यू...
मंगलवार, 12 जुलाई 2016

छिछियैनी दुर्गन्ध

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छिछियैनी दुर्गन्ध  (अरुण साथी) बोन चाइना की कशीदाकारी प्लेट में जब गोश्त का टुकड़ा डाला तो अजीब सी छिछियैनी दुर्गन्ध आई... पांच सितारा भव्यता...
बुधवार, 15 जून 2016

अभी हारा नहीं हूँ मैं...

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नहीं अभी हारा नहीं हूँ मैं.. गिरा भर हूँ मुँह के बल ही सही गिर जाना हारना नहीं होता.. फिर उठ कर चलूँगा एक एक कदम ही सही मंजिल की ओर ...
गुरुवार, 26 मई 2016

साथी के बकलोल वचन

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साथी के बकलोल वचन 😶😶😶 बिहार में आईलो ई कइसन विहान, लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान ! कहिनो मर्डर, कहिनो किडनैप, कहिनो रंगदारी त कहिनो ह...

साथी के बकलोल वचन

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साथी के बकलोल वचन 😶😶😶 बिहार में आईलो ई कइसन विहान, लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान ! कहिनो मर्डर, कहिनो किडनैप, कहिनो रंगदारी त कहिनो ह...
बुधवार, 30 मार्च 2016

मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ, हाँ मैं भूख से नहीं मरा..

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मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ, हाँ मैं भूख से नहीं मरा.. (अरुण साथी) हाँ मैं जागो मांझी ही बोल रहा हूँ गलत है कि मैं मर गया हूँ मैं मर कैसे...
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सोमवार, 21 मार्च 2016

उल्टी करता आदमी.

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उल्टी करता आदमी.. पता नहीं क्यों दूसरों की वनिस्पत कुछ आदमी में बड़ी कमी होती? दूसरे हजम कर जाते है बहुत कुछ कई तो सबकुछ जैसे वो आदम...
शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

रोज डे पे साथी के बकलोल वचन

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रोज डे पे साथी के बकलोल वचन (अरुण साथी) 🌹🌹🌹 रोज डे पे श्रीमती जी को जब गुलाब दिया तो उसके चेहरे पे प्रेम का भाव नहीं पाया, मैं अत...
शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

पहली सी मोहब्बत नहीं रही....

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उनको अब मुझसे शिकायत नहीं है, शायद अब पहली सी मोहब्बत नहीं रही। दुश्मनों से भी हंस-बोल लिया करते थे, शायद अब ...
रविवार, 31 जनवरी 2016

ब्रह्मपुत्र

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स्वर्ण देश का प्रजापालक था वह.. स्वर्ग में सीढ़ी लगाने, समुन्द्र जल मीठा करने का राष्ट्रवादी स्वप्नद्रष्टा थ...
गुरुवार, 21 जनवरी 2016

बिहार में बहार हो!!

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#साथी के #बकलोल_वचन कड़ी में  मगही कविता के माध्यम से बिहार के दर्द के आवाज देलियो हें।  बिहार में बहार हो!!  बिहार में आईलो ई कई...
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सोमवार, 18 जनवरी 2016

साथी के बकलोल वचन (जंगलराज आयो)

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कुख्यात पति मंडल को एमएलए पत्नी भारती ने थाने से छुड़ायो, 😡😡😜 थानेदार को कान के नीचे दो बजायो, ...
मंगलवार, 10 नवंबर 2015

अप्प दीपो भवः

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अप्प दीपो भवः ** दीया हमें बताता है। जलना हमें सिखाता।। ** छाये जब घंधोर अँधेरा, दीया नहीं घब...
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बुधवार, 9 सितंबर 2015

एक निराशावादी कविता

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समुन्द्र किनारे तूफानी तरंगों से बचते-बचाते बनाया जिसे उस घरौंदे को जाने क्यूँ मिटा देने का  मन करता है... बचप...
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गुरुवार, 3 सितंबर 2015

फगुनिया

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फगुनिया *** रे फगुनिया सुन रही है रे तू ठन ठन, ठनाक यह छेनी हथौड़ी की आवाज़ नहीं है रेयह प्रेमी की हाँक है हनक है सनक है सुन रे फग...
रविवार, 23 अगस्त 2015

एक सवाल

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एक सवाल  ** सवाल यह नहीं है कि हम अपनों के लिए  क्यूँ करते है कर्म-कुकर्म  पुण्य-पाप..? ** सवाल तो यह भी नहीं है  क...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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