साथी

गुरुवार, 26 मई 2016

साथी के बकलोल वचन

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साथी के बकलोल वचन 😶😶😶 बिहार में आईलो ई कइसन विहान, लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान ! कहिनो मर्डर, कहिनो किडनैप, कहिनो रंगदारी त कहिनो ह...

साथी के बकलोल वचन

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साथी के बकलोल वचन 😶😶😶 बिहार में आईलो ई कइसन विहान, लगो हे जैसे ई हो गेल अफगान ! कहिनो मर्डर, कहिनो किडनैप, कहिनो रंगदारी त कहिनो ह...
बुधवार, 30 मार्च 2016

मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ, हाँ मैं भूख से नहीं मरा..

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मैं जागो मांझी बोल रहा हूँ, हाँ मैं भूख से नहीं मरा.. (अरुण साथी) हाँ मैं जागो मांझी ही बोल रहा हूँ गलत है कि मैं मर गया हूँ मैं मर कैसे...
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सोमवार, 21 मार्च 2016

उल्टी करता आदमी.

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उल्टी करता आदमी.. पता नहीं क्यों दूसरों की वनिस्पत कुछ आदमी में बड़ी कमी होती? दूसरे हजम कर जाते है बहुत कुछ कई तो सबकुछ जैसे वो आदम...
शनिवार, 6 फ़रवरी 2016

रोज डे पे साथी के बकलोल वचन

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रोज डे पे साथी के बकलोल वचन (अरुण साथी) 🌹🌹🌹 रोज डे पे श्रीमती जी को जब गुलाब दिया तो उसके चेहरे पे प्रेम का भाव नहीं पाया, मैं अत...
शुक्रवार, 5 फ़रवरी 2016

पहली सी मोहब्बत नहीं रही....

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उनको अब मुझसे शिकायत नहीं है, शायद अब पहली सी मोहब्बत नहीं रही। दुश्मनों से भी हंस-बोल लिया करते थे, शायद अब ...
रविवार, 31 जनवरी 2016

ब्रह्मपुत्र

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स्वर्ण देश का प्रजापालक था वह.. स्वर्ग में सीढ़ी लगाने, समुन्द्र जल मीठा करने का राष्ट्रवादी स्वप्नद्रष्टा थ...
गुरुवार, 21 जनवरी 2016

बिहार में बहार हो!!

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#साथी के #बकलोल_वचन कड़ी में  मगही कविता के माध्यम से बिहार के दर्द के आवाज देलियो हें।  बिहार में बहार हो!!  बिहार में आईलो ई कई...
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सोमवार, 18 जनवरी 2016

साथी के बकलोल वचन (जंगलराज आयो)

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कुख्यात पति मंडल को एमएलए पत्नी भारती ने थाने से छुड़ायो, 😡😡😜 थानेदार को कान के नीचे दो बजायो, ...
मंगलवार, 10 नवंबर 2015

अप्प दीपो भवः

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अप्प दीपो भवः ** दीया हमें बताता है। जलना हमें सिखाता।। ** छाये जब घंधोर अँधेरा, दीया नहीं घब...
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बुधवार, 9 सितंबर 2015

एक निराशावादी कविता

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समुन्द्र किनारे तूफानी तरंगों से बचते-बचाते बनाया जिसे उस घरौंदे को जाने क्यूँ मिटा देने का  मन करता है... बचप...
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गुरुवार, 3 सितंबर 2015

फगुनिया

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फगुनिया *** रे फगुनिया सुन रही है रे तू ठन ठन, ठनाक यह छेनी हथौड़ी की आवाज़ नहीं है रेयह प्रेमी की हाँक है हनक है सनक है सुन रे फग...
रविवार, 23 अगस्त 2015

एक सवाल

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एक सवाल  ** सवाल यह नहीं है कि हम अपनों के लिए  क्यूँ करते है कर्म-कुकर्म  पुण्य-पाप..? ** सवाल तो यह भी नहीं है  क...
गुरुवार, 16 जुलाई 2015

अपनी लाश को ढोना...

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(अपनी वेदना को शब्द दी है, बस...) पहाड़ सी जिंदगी  का बोझ पीड़ादायी होता है.. उससे अधिक पीड़ादायी हो जाता है किसी अपन...
सोमवार, 6 जुलाई 2015

निराश मत हो...

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शनै: शनै: अस्ताचल की ओर जाते सूरज को देख बहुत आशान्वित हो जाता हूं, जैसे  उर्जा की एक नई किरण समाहित हो अन्तः को जागृत कर रही हो......
शुक्रवार, 10 अप्रैल 2015

"साथी" ने अर्ज़ किया है..

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थोड़ी संजीदगी, थोड़ा एहसास दे दे । ऐ मोहब्बत, उनको भी मेरी प्यास दे दे ।। *** उनकी बेवफाई का कहीं शिकवा न करूँ । अपनी मोहब्बत को कहीं रुस...
सोमवार, 30 मार्च 2015

गांव और मैट्रो की जिन्दगी...

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गांव और मैट्रो की जिन्दगी में  थोड़ी सा फर्क होता है बेमौसम बारिस  और ओला गिरने पर सोशल मीडिया पे मैट्रोवासी  और एफएम पे आरजे चुहल ...
रविवार, 22 मार्च 2015

"साथी" के बकलोल वचन / (बिहार के हालात पे मगही कविता)

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बुढ़िया के बृद्धापेंशन ले दौराबो हा । जुअनका के रोजगार ले परदेश भगाबो हा ।। कैसन बिहार दिवस मनाबो हा... *** गरिबका के रहे ले झोपड़िय...
गुरुवार, 19 मार्च 2015

बसंत.....

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बसंत *** झड़ झड़ पतझड़ हमें बताता है, जीवन सुख और दुःख है हमें सिखाता है... आज है पतझड़ तो कल बसंत आएगा, झड़ झड़...
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बुधवार, 4 मार्च 2015

जोगीरा सा रा रा रा / बुरा मानो होली है

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मोदी बनिया बड़ी सियाना, नोन-भात नै खाय। आडानी के गले लगाबे, किसान पेट पकड़ डिरराय...।। जोगीरा सा रा रा रा.. जोगीरा सा रा रा रा.. *** रे अ...
शनिवार, 21 फ़रवरी 2015

समाजवाद का अंतिम निष्कर्ष..

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लोहिया और जेपी की विचारधारा का उत्कर्ष देखिये *** सेफई में दम तोड़ते समाजवाद का अंतिम संघर्ष देखिये....
शनिवार, 14 फ़रवरी 2015

बेलनटाइन डे पर ‘‘साथी’’ का दर्द (मगही हास्य कविता )

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(अरूण साथी) बेलनटाइन डे पर  हम्मर कन्याय रूठल हो नोन, तेल, हरदी खातिर घर में तोप छूटल हो..... कहलको, जरलहवा के  मन कत्...
मंगलवार, 27 जनवरी 2015

दर्दनाक मौत

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ओबामा है बुलेट रेल है स्मार्ट सीटी है परमाणु उर्जा है गंगा सफाई है सड़क सफाई है उधोग है उधोगपति है बहुत कुछ है इस चकाचौंध में बस नहीं है...
शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

गिरगिट

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अपने बेटे को गिरगिटाधिराज की उपाधी दिए जाने पर पिता ने कहा... मेरा बिटुआ भी पुरखों का नाम रौशन करने लगा है... अब यह भ...
सोमवार, 10 नवंबर 2014

आदमी श्रेष्ठ या गदहा ..

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आदमी को गदहा कहे जाने का गदहा संध के अध्यक्ष ने कड़ विरोध जताया है कहा.. "आदमी ने धर्म-जाति के नाम पर भाई को लड़...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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