साथी

मंगलवार, 27 जनवरी 2015

दर्दनाक मौत

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ओबामा है बुलेट रेल है स्मार्ट सीटी है परमाणु उर्जा है गंगा सफाई है सड़क सफाई है उधोग है उधोगपति है बहुत कुछ है इस चकाचौंध में बस नहीं है...
शुक्रवार, 28 नवंबर 2014

गिरगिट

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अपने बेटे को गिरगिटाधिराज की उपाधी दिए जाने पर पिता ने कहा... मेरा बिटुआ भी पुरखों का नाम रौशन करने लगा है... अब यह भ...
सोमवार, 10 नवंबर 2014

आदमी श्रेष्ठ या गदहा ..

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आदमी को गदहा कहे जाने का गदहा संध के अध्यक्ष ने कड़ विरोध जताया है कहा.. "आदमी ने धर्म-जाति के नाम पर भाई को लड़...
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शनिवार, 8 नवंबर 2014

बेवफाई

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शाम ढलते ही याद आती है वो। बिछड़ के भी कितना सताती है वो।। ------------------------------------ वो भी एक दौर था, हर शाम उनके नाम थी। आज...
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शुक्रवार, 31 अक्टूबर 2014

धुंआ उठता है..

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आंसू मेरे बहे  भींगे उनके नयन दर्द मुझकों मिला  सजी उनकी गजल न चिंगारी उठी न आग लगी फिर भी जलन है तपन है और धु...
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मंगलवार, 21 अक्टूबर 2014

साथी के बकलोल वचन

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कुछ श्रमजीवी मीडिया मजदूर धन-तरस कहलाते है इसलिए धनतेरस पे खाली हाथ  घर जाते है बीबी की डांट खाते है और बेचारे दांत ही दिखाते है ...
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बुधवार, 24 सितंबर 2014

देवी दुर्गा

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घर से लेकर बाहर तक, नारी का करते नहीं सम्मान। फिर दुर्गा पाठ और मूर्ति पूजा का क्यूँ धरते हैं स्वांग।। -----------------------------------...
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रविवार, 14 सितंबर 2014

चलो हिन्दी दिवस मनाते है..

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राम-राम, नमस्ते भूल, हाय-हल्लो बतियाते है. नेता हो या अभिनेता, हिन्दी से सब शर्माते है. पर हिन्दी दिवस मनाते है... बच्चों को भी काउ, डा...
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शनिवार, 21 जून 2014

माँ, बचपन और मेघ

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आओ मेघ में भींग कर, मजा लें माँ की डाँट सुने,  बाबू जी के मार का मजा लें... मेघ में भींग कर आम चुने मतलू चाचा को छका...
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शुक्रवार, 13 जून 2014

साहेब, बीबी और अच्छे दिन..

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47 साल बाद साहेब ने जब  शपथ पत्र में बीबी की डाला तो तिवारी बाबा ने भी लिए सात फेरे  और 88 साल की उम्र में  डाल ली वर-माला! ...........
शनिवार, 7 जून 2014

उल्फ़त यूँ आजमाती है...

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सताती है, रुलाती है। उल्फ़त क्या क्या कराती है? रूठती है , मनाती है। उल्फ़त ऐसे जताती है।। रोती है, हँसाती है। उल्फ़त यूँ ही सुहाती ह...
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शुक्रवार, 16 मई 2014

नई सुबह.....नया आगाज

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नई सुबह उम्मीद की हो नई सुबह लाये विश्वास नई सुबह समता की हो नई सुबह जगाये आश नई सुबह रोटी की हो नई सुबह मिटाये बनवास नई सुबह में भा...
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रविवार, 11 मई 2014

कुलटा (मातृत्व दिवस पर)

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चुपचाप बैठा सोंच रहा हूँ क्या कुंती को  अधिकार नहीं था कर्ण को मातृत्व सुख देती.....? या कि कर्ण का वंचित पुरूषार्थ दानवीर होकर भी दम...
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शुक्रवार, 2 मई 2014

प्रेम और ईश्वर

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मीरा तब भी थी  मीरा अब भी है  कृष्ण के माथे तब भी कलंक लगा कृष्ण के माथे अब कलंक है  मीरा तब भी पापिन थी  मीरा अब भी पापिन है  प्र...
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बुधवार, 30 अप्रैल 2014

क्या खोया.. क्या पाया...?

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वह भी क्या दिन थे, हम साथ-साथ रहते थे। सुख-दुख सब मिलकर, एक साथ सहते थे। चाचा और चाची को, बड़का बाबू और बड़की माय कहते थे। अब वो अंकल,...
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शुक्रवार, 21 मार्च 2014

कभी कभी उदास होता हूँ....

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बस यूँ ही कभी कभी उदास होता हूँ। कुछ दर्द टीसते है तो छुप के रोता हूँ।। जिंदगी से गिला भी हो तो क्या होगा। ख़ुशी वहीँ मिलती है, जहाँ खोत...
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शनिवार, 15 मार्च 2014

बुरा न मानो होली है...

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केजरीवाल ******** दुर्वाषा की तरह बन गयो हे ‘‘आप’’। घूम-घूम के खाली-पीली दे रहो हे श्राप।। आम आदमी की महिमा हे बड़ी ही भारी। टेम्पू, मै...
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गुरुवार, 6 मार्च 2014

जास्ती केजरीवाल बनने का नै......

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जन्नत गुजरात में है, मान लो, फालतू में सान-पट्टी करने का नै। मार-कुटाई होगी, ऑफिस पे चढ़ने का नै। 67 साल से लूट, बांट खा रहे, 59 दिन ...
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शनिवार, 1 मार्च 2014

अहमक (चंद टुकड़े)

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दुनिया-ए-बाज़ार में रहा अहमक की तरह। साथी तुझे सौदागरी नहीं आती। । कुछ मोल भाव भी हो रिश्तों में।  तुझे तक़ल्लुफ़ की बाज़ीगरी नहीं आती। । ...
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गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

नींद में हो क्या तुम?

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1 पंजे बाली सरकार ने भारत निर्माण का नया नुस्खा दिया है। रोटी/पानी कपड़ा/मकान और दवाई की जगह एटीएम/फ्लाई ओवर मैट्रो/एयरपोर्ट... ...
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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

इश्कतारी है.....

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जबसे साथी पे इश्कतारी है। हर पल उनकी खुमारी है।। आँखों में फुल सा चेहरा। दिल में खिली फुलबाड़ी है।। होठों पे है हंसी हरदम। ये कै...
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बुधवार, 19 फ़रवरी 2014

अब कहां अंधेरों से डर लगता है?

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अब कहां अंधेरों से डर लगता है? साथ रहा इतना, की घर लगता है।। तेरी जुल्फों की छांव बहुत है शकून के लिए। बिछड़ा तो, फिरूंगा दर-व-दर लगता ह...
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शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

रोज डे पे बीबी को गुलाब जो दिया...

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रोज डे पे बीबी को गुलाब जो दिया। मुफ्त का ही आफत मोल ले लिया।। बोली इतने सालो तक तो दिया नहीं, वह हड़क गई। लाल गुलाब को देख सांढ़िन की ...
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बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

घड़ियाली आंसू भी आंखों में यार होना चाहिए.....

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घड़ियाली आंसू भी आंखों में यार होना चाहिए। इस दौर में आदमी को दुनियादार होना चाहिए.. हों कहीं भी, खुश रहे हमदम अपना। चाहने वालों के दिलो...
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शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

वह मुझकों भी काफिर कहने लगा है..

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अब कोई क्यों मुझसे खफा हो। मैं खुद से ही खफा रहने लगा हूं।। गैरों से अब शिकवा कैसा। अपनों का तंज सहने लगा हूं।। चापलूसों के दौर में स...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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