साथी

शुक्रवार, 21 मार्च 2014

कभी कभी उदास होता हूँ....

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बस यूँ ही कभी कभी उदास होता हूँ। कुछ दर्द टीसते है तो छुप के रोता हूँ।। जिंदगी से गिला भी हो तो क्या होगा। ख़ुशी वहीँ मिलती है, जहाँ खोत...
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शनिवार, 15 मार्च 2014

बुरा न मानो होली है...

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केजरीवाल ******** दुर्वाषा की तरह बन गयो हे ‘‘आप’’। घूम-घूम के खाली-पीली दे रहो हे श्राप।। आम आदमी की महिमा हे बड़ी ही भारी। टेम्पू, मै...
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गुरुवार, 6 मार्च 2014

जास्ती केजरीवाल बनने का नै......

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जन्नत गुजरात में है, मान लो, फालतू में सान-पट्टी करने का नै। मार-कुटाई होगी, ऑफिस पे चढ़ने का नै। 67 साल से लूट, बांट खा रहे, 59 दिन ...
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शनिवार, 1 मार्च 2014

अहमक (चंद टुकड़े)

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दुनिया-ए-बाज़ार में रहा अहमक की तरह। साथी तुझे सौदागरी नहीं आती। । कुछ मोल भाव भी हो रिश्तों में।  तुझे तक़ल्लुफ़ की बाज़ीगरी नहीं आती। । ...
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गुरुवार, 27 फ़रवरी 2014

नींद में हो क्या तुम?

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1 पंजे बाली सरकार ने भारत निर्माण का नया नुस्खा दिया है। रोटी/पानी कपड़ा/मकान और दवाई की जगह एटीएम/फ्लाई ओवर मैट्रो/एयरपोर्ट... ...
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मंगलवार, 25 फ़रवरी 2014

इश्कतारी है.....

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जबसे साथी पे इश्कतारी है। हर पल उनकी खुमारी है।। आँखों में फुल सा चेहरा। दिल में खिली फुलबाड़ी है।। होठों पे है हंसी हरदम। ये कै...
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बुधवार, 19 फ़रवरी 2014

अब कहां अंधेरों से डर लगता है?

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अब कहां अंधेरों से डर लगता है? साथ रहा इतना, की घर लगता है।। तेरी जुल्फों की छांव बहुत है शकून के लिए। बिछड़ा तो, फिरूंगा दर-व-दर लगता ह...
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शुक्रवार, 7 फ़रवरी 2014

रोज डे पे बीबी को गुलाब जो दिया...

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रोज डे पे बीबी को गुलाब जो दिया। मुफ्त का ही आफत मोल ले लिया।। बोली इतने सालो तक तो दिया नहीं, वह हड़क गई। लाल गुलाब को देख सांढ़िन की ...
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बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

घड़ियाली आंसू भी आंखों में यार होना चाहिए.....

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घड़ियाली आंसू भी आंखों में यार होना चाहिए। इस दौर में आदमी को दुनियादार होना चाहिए.. हों कहीं भी, खुश रहे हमदम अपना। चाहने वालों के दिलो...
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शनिवार, 1 फ़रवरी 2014

वह मुझकों भी काफिर कहने लगा है..

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अब कोई क्यों मुझसे खफा हो। मैं खुद से ही खफा रहने लगा हूं।। गैरों से अब शिकवा कैसा। अपनों का तंज सहने लगा हूं।। चापलूसों के दौर में स...
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गुरुवार, 16 जनवरी 2014

नाप देता है आदमी

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नाप देता है आदमी जरा सा हंस-बोल  क्या लिया नाप देता है आदमी औरत का पूरा देह वामन की तरह... औरत की देह की चौहद्दी ...
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रविवार, 12 जनवरी 2014

मेंहदीं का सुर्ख रंग...और बिखरे छींटे,,,

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वे दिलों से खेलने में बड़ी हुनरमंद, टूटे दिलों से खेलकर भी मजा लेते है। उनकी मेंहदीं का रंग सुर्ख यूं ही नहीं, दिल के लहू को वह हथेली पे...
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गुरुवार, 9 जनवरी 2014

देह बेच देती तो कितना कमाती...

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(यह पुरानी रचना मैंने झाझा के आदिवासी ईलाके में कई दिन बिताने के बाद लिखी थी आपके लिए हाजिर है।) --------------------------------------...
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मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

सोंचा न था

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वाकिफ तो था तुम्हारी फितरत से। वेबजह वेवफा होगे, सोंचा न था।। ऐतवार न था फिर भी ताउम्र इंतजार किया। मैयत पे भी मेरी न आओगे, सोंचा न था।...
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शनिवार, 21 दिसंबर 2013

गिद्ध

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आज कल घरती पर गिद्ध हर जगह रहते है.. आज ही तो आइसक्रीम बेच रहे नन्हें चुहवा पर चलाया था चान्गुर गाल पर पंजे का निशान उग आये बक्क! ...
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शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

बराक ओबामा ने बीबी के डर से सिगरेट पीना छोडा़। ई समाचार पर भोरे भोरे ए गो निम्मन, हंसाबे बाला, मगही कविता...तनि मुस्कुरा के पढ़िया..

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जहिना से ओबामा के अपन मलकीनी से डरे बाला बात हमर मलकीनी जनलको हें तहिना से रोज हमरा से लडे़ ले ठनलको हें.. ओलहन सुन सुन के जब थक ग...
रविवार, 22 सितंबर 2013

रामधारी सिंह "दिनकर" को जन्म दिन पर नमन....

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दिल्ली(कविता)   रामधारी सिंह "दिनकर" यह कैसी चांदनी अम के मलिन तमिर की इस गगन में, कूक रही क्यों नियति व्यंग से इस गोधूलि-लगन...
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बुधवार, 11 सितंबर 2013

राम की जगह रोटी दे दो..

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1 राम की जगह रोटी दे दो, कोई भूखे का भगवान् नहीं होता. रहीम के बंदों बगैर मुसलम इमां, कोई मुसलमान नहीं होता.. 2 पांचों वक्त नमाज पढ़ों...
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शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

लैंपपोस्ट

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तुफानों की घिरी जिंदगी डूबती-उतरती रहती है.. कभी सतह पर तलाशती है कोई तिनका.. कभी तलाशती है उसे जो खोया ही नहीं... कभी भरकर म...
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सोमवार, 26 अगस्त 2013

सुबह सुबह की थोड़ी चुहलबाजी.... इरशाद कहिए..

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1 वोट बैंक ***** सोनिया मैडम लेकर आई रोटी मोदी कहते राम नाम की फेरो माला कहत साथी सुने भाई मतबाला भूखे भजन न होई गोपाला... 2 रिस्क...
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गुरुवार, 22 अगस्त 2013

नेता जी उवाच-नाच जमूरे नाच

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चुनाव आते ही नेता धर्म की डुगडुगी बजा रहंे हैं। जमूरे की तरह हमको अपने ईशारे पर नचा रहें हैं। कहीं टोपी पहन, हमको ही टोपी पहना रहें हैं।...
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शनिवार, 3 अगस्त 2013

फ्रेंडशिप डे

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फेसबुक फ्रेंड का इतना सा बास्ता है। कॉमेंट गिव एण्ड टेक का यह सिंपल सा रास्ता है।। फेसबुक की ही तरह अब दोस्ती भी मॉडर्न हो गई। दुख-दर्द...
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गुरुवार, 1 अगस्त 2013

किसान की छाती

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धरती की छाती पर बुन आया है किसान अपने बेटी के ब्याह की उम्मीद.. उगा आया है खेत में कुछ रूपये मालिक के मूंह पर मारने को जिससे दरबाजे पर...
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सोमवार, 15 जुलाई 2013

भूख, बिल्ली और नेता..

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अब कलावती के घर  बिल्ली भी नहीं आती समझती है वह  कई दिनों से खामोश चुल्हे  और भूख से बिलखते बच्चों का दर्द पर हे जनतंत्र क...
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शुक्रवार, 31 मई 2013

आंख में पानी नहीं रहा (गजल)

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इस दौर में आदमी के आंख में पानी नहीं रहा। आदमी है, आदमीयत की निशानी नहीं रहा।। सज गए है घर-गली कागज के फूल से। बाजार की खुश्बू ...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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