साथी

गुरुवार, 16 जनवरी 2014

नाप देता है आदमी

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नाप देता है आदमी जरा सा हंस-बोल  क्या लिया नाप देता है आदमी औरत का पूरा देह वामन की तरह... औरत की देह की चौहद्दी ...
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रविवार, 12 जनवरी 2014

मेंहदीं का सुर्ख रंग...और बिखरे छींटे,,,

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वे दिलों से खेलने में बड़ी हुनरमंद, टूटे दिलों से खेलकर भी मजा लेते है। उनकी मेंहदीं का रंग सुर्ख यूं ही नहीं, दिल के लहू को वह हथेली पे...
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गुरुवार, 9 जनवरी 2014

देह बेच देती तो कितना कमाती...

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(यह पुरानी रचना मैंने झाझा के आदिवासी ईलाके में कई दिन बिताने के बाद लिखी थी आपके लिए हाजिर है।) --------------------------------------...
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मंगलवार, 24 दिसंबर 2013

सोंचा न था

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वाकिफ तो था तुम्हारी फितरत से। वेबजह वेवफा होगे, सोंचा न था।। ऐतवार न था फिर भी ताउम्र इंतजार किया। मैयत पे भी मेरी न आओगे, सोंचा न था।...
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शनिवार, 21 दिसंबर 2013

गिद्ध

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आज कल घरती पर गिद्ध हर जगह रहते है.. आज ही तो आइसक्रीम बेच रहे नन्हें चुहवा पर चलाया था चान्गुर गाल पर पंजे का निशान उग आये बक्क! ...
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शुक्रवार, 15 नवंबर 2013

बराक ओबामा ने बीबी के डर से सिगरेट पीना छोडा़। ई समाचार पर भोरे भोरे ए गो निम्मन, हंसाबे बाला, मगही कविता...तनि मुस्कुरा के पढ़िया..

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जहिना से ओबामा के अपन मलकीनी से डरे बाला बात हमर मलकीनी जनलको हें तहिना से रोज हमरा से लडे़ ले ठनलको हें.. ओलहन सुन सुन के जब थक ग...
रविवार, 22 सितंबर 2013

रामधारी सिंह "दिनकर" को जन्म दिन पर नमन....

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दिल्ली(कविता)   रामधारी सिंह "दिनकर" यह कैसी चांदनी अम के मलिन तमिर की इस गगन में, कूक रही क्यों नियति व्यंग से इस गोधूलि-लगन...
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बुधवार, 11 सितंबर 2013

राम की जगह रोटी दे दो..

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1 राम की जगह रोटी दे दो, कोई भूखे का भगवान् नहीं होता. रहीम के बंदों बगैर मुसलम इमां, कोई मुसलमान नहीं होता.. 2 पांचों वक्त नमाज पढ़ों...
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शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

लैंपपोस्ट

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तुफानों की घिरी जिंदगी डूबती-उतरती रहती है.. कभी सतह पर तलाशती है कोई तिनका.. कभी तलाशती है उसे जो खोया ही नहीं... कभी भरकर म...
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सोमवार, 26 अगस्त 2013

सुबह सुबह की थोड़ी चुहलबाजी.... इरशाद कहिए..

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1 वोट बैंक ***** सोनिया मैडम लेकर आई रोटी मोदी कहते राम नाम की फेरो माला कहत साथी सुने भाई मतबाला भूखे भजन न होई गोपाला... 2 रिस्क...
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गुरुवार, 22 अगस्त 2013

नेता जी उवाच-नाच जमूरे नाच

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चुनाव आते ही नेता धर्म की डुगडुगी बजा रहंे हैं। जमूरे की तरह हमको अपने ईशारे पर नचा रहें हैं। कहीं टोपी पहन, हमको ही टोपी पहना रहें हैं।...
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शनिवार, 3 अगस्त 2013

फ्रेंडशिप डे

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फेसबुक फ्रेंड का इतना सा बास्ता है। कॉमेंट गिव एण्ड टेक का यह सिंपल सा रास्ता है।। फेसबुक की ही तरह अब दोस्ती भी मॉडर्न हो गई। दुख-दर्द...
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गुरुवार, 1 अगस्त 2013

किसान की छाती

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धरती की छाती पर बुन आया है किसान अपने बेटी के ब्याह की उम्मीद.. उगा आया है खेत में कुछ रूपये मालिक के मूंह पर मारने को जिससे दरबाजे पर...
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सोमवार, 15 जुलाई 2013

भूख, बिल्ली और नेता..

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अब कलावती के घर  बिल्ली भी नहीं आती समझती है वह  कई दिनों से खामोश चुल्हे  और भूख से बिलखते बच्चों का दर्द पर हे जनतंत्र क...
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शुक्रवार, 31 मई 2013

आंख में पानी नहीं रहा (गजल)

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इस दौर में आदमी के आंख में पानी नहीं रहा। आदमी है, आदमीयत की निशानी नहीं रहा।। सज गए है घर-गली कागज के फूल से। बाजार की खुश्बू ...
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शुक्रवार, 3 मई 2013

घृणा

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उस दिन कथित अधार्मिक  मठाधीश को अपदस्त कर  गांव में जश्न मना तो मैं भी बहुत खुश हुआ.... चलकर देखने गया अपनी खुशी ...
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बुधवार, 17 अप्रैल 2013

देशबा के हाल ( मगही कविता)

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(तनि अपन बोली, तनि अपन भाषा। आय सांझ एगो मगही कविता के मन होलै से लिख दिलिऐ। मुदा अपने सबके कैसन लगलै बतैथिन।) देशबा के हाल देशबा के हा...
शनिवार, 16 मार्च 2013

शिखर.....(काव्य)

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शिखर पर पहुंचना बहुत मुश्किल नहीं है। साहस धैर्य निरन्तर प्रयास और जुनून हो तो हर कोई पहुंच सकता है.. मुश्किल है शिखर पर टिक पाना !...
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सोमवार, 11 मार्च 2013

फेसबुक पर दिल्लगी के कुछ बिखरे हुए टुकड़े

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क्या कहूं कैसी हो तुम बिल्कुल चांद की जैसी हो तुम.... (अभी अभी एक अतिसुंदरी की तस्वीर देख कर बेईमान मन ने शरारत की है....) मैंने शुरू...
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रविवार, 10 मार्च 2013

अधजली लड़की

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कल महाशिवरात्री के दिन ही सृष्टी की रचना करने वाली एक बेटी ने इहलीला समाप्त कर ली। वह भी एक सैतेली मां की प्रताड़ना से आजीज होकर। या मामल...
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शुक्रवार, 22 फ़रवरी 2013

गुमराह

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जिंदगी जी जाती है अपने हिसाब है। गुमराह लोग जीते है नजरे किताब से।। सोहबत से जान जाओगे फितरत सभी का। एक दिन झांक ह...
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शनिवार, 9 फ़रवरी 2013

धुंआं-धुंआं

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झुग्गी-झोपड़ियों से निकलते धुंऐं को कभी मौन होकर देखना... उसमें कुछ तस्वीर नजर आऐगी.. जो आपसे बोलेगी, बतियायेगी.... पूछेगी एक सवा...
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गुरुवार, 24 जनवरी 2013

कत्ल करने का बहाना चाहिए (साथी के बोल बच्चन)

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अब जहां में कत्ल करने का बस बहाना चाहिए। दौर ऐसा है साथी तो, मोहब्बत को भी आजमाना चाहिए।। यूं तो एक नजर में जान जाओगे कि जानवर शैतान है...
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मंगलवार, 8 जनवरी 2013

बुरा लगता है (पाक के नापाक कदम पर ‘‘साथी’’ का दर्द)

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जान कर भी बनते हो अनजान, बुरा लगता है। फितरत से जुदा हो उनमान, बुरा लगता है।। यूं तो कातिले-कौम हो तुम। कहलाते हो इंसान, बुरा लगता है।...
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गुरुवार, 3 जनवरी 2013

आइए कविवर अदम गोंडकी की इन कविताओं के माध्यम से वर्तमान को देखें...

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1 जिस्म क्या है रूह तक सब कुछ ख़ुलासा देखिये आप भी इस भीड़ में घुस कर तमाशा देखिये जो बदल सकती है इस पुलिया के मौसम का मिजाज़ उस युवा प...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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