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रविवार, 29 जनवरी 2012

कितनी हसीन हो तुम

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( ब्लॉगों पर बिचरते हुए एक ब्लॉग पर जाना हुआ और उनकी कविता को पढ़कर कुछ कीबोर्ड पर उकेर दिया...) कितनी ...
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बुधवार, 25 जनवरी 2012

अपने ही देश में तिरंगा पराया हो जाएगा।

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किसने सोंचा था ‘‘केसरिया’’ आतंक के नाम से जाना जाएगा। ‘‘सादा’’ की सच्चाई गांधी जी के साथ जाएगा। ‘‘हरियाली’’ के देश में किसा...
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सोमवार, 23 जनवरी 2012

गांव का अंधविश्वास और विलुप्त नैतिकता।

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गांव में उड़ते हुए नीलकंठ को देखना शुभ है और यात्रा पर निकलते हुए यात्री ढेला मार कर इसे उड़ते है.... और कौआ छप्पर पर बैठ कर जब कर...
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मंगलवार, 17 जनवरी 2012

मुसाफिर जिंदगी..

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होने और नहीं होने के बीच संषर्ध करती जिंदगी में होना ही सबकुछ नहीं होता? नहीं होना भी, बहुत कुछ होता है! जैसे की, देह के लिए सांस...
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शुक्रवार, 13 जनवरी 2012

शुन्यता?

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(अरूण साथी सुबह सुबह प्याज छिलते हुए) सबकुछ उघाड़ देना चाहता हूं, जीवन ने जो दिया उसको, जीवन ने जो लिया उसको, स्याह, सफेद, निरर्थक,...
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शुक्रवार, 6 जनवरी 2012

हे भारती देखो तुम

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हे भारती देखो तुम, कैसे अपने ही आज लूट रहे, कैसे आतंकी धर्मभेष में छूट रहे। हे भारती देखो तुम, कैसे, गांधी की टोपी आज लुटे...
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सोमवार, 2 जनवरी 2012

अपना प्यारा गांव।

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(पटना एयरपोर्ट पर इंतजार करते हुए गढ़े गए कुछ शब्द...) यह दुनिया कुछ अजीब है पता नहीं, पर अनमना सा हूं भीड़ है, पर मैं अकेला हूं क...
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शनिवार, 24 दिसंबर 2011

मैं आत्म हत्या नहीं करना चाहता हूं?

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मरना कौन चाहता है? किसे अच्छा लगता है जीना, बनकर एक लाश। करने से पहले आत्महत्या, करना पड़ता है संधर्ष, खुद से। पर पाने से पहले ...
13 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 13 दिसंबर 2011

मुझे बहुत गुस्सा आता है.....

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मैं बेवजह उलझ पड़ता हूं सबसे अपने-पराये की पहचान भी नहीं है अक्सर अपने देते रहते है यह सलाह कहते हैं छोटी-छोटी बातों को इगनोर करो... ...
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शनिवार, 3 दिसंबर 2011

सुबह की कुछ क्षणिकाऐं

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1 सत्ता और विपक्ष। उनके रूठने की अदा सुभानअल्ला, उनके मनाने की अदा माशाअल्ला। हम भी है वाकिफ इस याराने से, अब कैसे बचे देश इस शातिरान...
11 टिप्‍पणियां:
गुरुवार, 1 दिसंबर 2011

औरत केवल औरत नहीं होती..

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औरत केवल औरत नहीं होती.. वे होती एक मां जिनकी आंचल में पलती है  जिंदगी। वे होती है एक पत्नी  जिनकी आंचल में पलता है प...
8 टिप्‍पणियां:
शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

अन्तराल

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अन्तराल.. दर्द और हंसी के बीच.. जो जुड़ा था उसके टूटने से पहले, होता है एक अन्तराल। टूटना नये का आगमन है.. पूष की रा...
20 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 31 अक्टूबर 2011

छठ का नजारा

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खरना का प्रसाद बनाती मां तेतारपुर गांव स्थित मालती पोखर का सुर्य मंदिर- जिसें एक महिला के द्वारा स्थापित किया गया एवं त...
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बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

खुबसूरत मकड़ी

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खुबसूरत मकड़ी की यह तस्वीर अपने गांव के बगीचे से खींची है। इस मकड़ी का आकार 9 इंच है और इसके जाले की आकार लगभग तीन फी...
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मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा?

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शेखपुरा जिले का घाटकोसुम्भ प्रखंड के तीन दर्जन से अधिक गांव कई माह तक पानी में डूबा रहता है और इसमें भी जिंदगी सूरज की किरणों की सुनहली प...
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शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011

कालकंट

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बचपन से बुढ़ापे तक, गांव की गलियों से महानगरों की अट्टालिकाओं तक, जीवन के आदि से अंत तक.. रोज-रोज क्षण-क्षण विषवमन...
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रविवार, 2 अक्टूबर 2011

शब्दों की चुहलबाजी (क्षणिकाऐं)

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1 गांधी जी से लेकर इबादत की टोपी तक, सबकुछ बांट देगें। राजनीति के चतुरसुजान, खून को भी सेकुलर कह छांट देगें! 2 मेरी आदतों का व...
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मंगलवार, 13 सितंबर 2011

दोस्ती.

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कभी कभी मैं भी झेंप जाता हूं, जब, मित्र के पत्तल से उठा कर मिठाई अपने पत्तल में डाल लेता हूं और लोग चौक कर अचरज से  मेरी ओर...
16 टिप्‍पणियां:
रविवार, 14 अगस्त 2011

अन्ना तुम संधर्ष करो हम तुम्हारे साथ है। कस्बाई इलाकों मे गुंजी अन्ना की आवाज।

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शेखपुरा अन्ना ने 16 अगस्त से शुरू होने वाले अनशन को देश की दूसरी आजादी का नाम दिया है और इसी दूसरी आजादी में अन्ना के साथ देने का शंखनाद क...
9 टिप्‍पणियां:

यह है दर्द में डूबी हुई हंसी।

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यह तस्वीर मैंने अपने गांव के मुहसर टोली से खींची है, इस बच्चे को देख कर बरबस ही मुंह से निकल गया... मैंने भी माथे पर लगाया है तिरंगा, ...
3 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 2 अगस्त 2011

इवादत के फूल

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मैंने तो फूल लाए थे इबादत के लिए उसको भी लहू में डुबो गया कोई... पैगामे मोहब्बत की हवा आज भी चलती तो है रास्ते में...
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गुरुवार, 28 जुलाई 2011

जब भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा तब क्या बचेगा?

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एक मित्र ने फेसबुक पर लिखा जब भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा तब क्या बचेगा? और मैने जबाब दिया. तब रहेगी- गरीब-गुरबों की खुशी दबे-कुचलों की हंसी ...
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बुधवार, 27 जुलाई 2011

अब कहां वो बात ?

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कितना शकून था  जब दो-एक कमरे का घर था  और थी एक मुठ्ठी   अपनी खुशी   अपना गम   अपनों का रूठना-रिझाना..   उसी छप्पर के नीचे   लड़ते झग...
2 टिप्‍पणियां:
मंगलवार, 12 जुलाई 2011

जलती जिंदगी

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ठीक सूरज के छुपने से पहले हाथ में लग्गी ले, आया एक सौतार का बेटा महुआ की दूर भागती टहनियों से कहा ‘‘तुम मेरी भूख से ज्यादा दूर नहीं भाग ...
15 टिप्‍पणियां:
सोमवार, 27 जून 2011

जी रहे है हम मुर्दों की तरह....

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जी रहे है हम मुर्दों की तरह.... मरा हुआ सांप देख हिम्मत वढ़ जाती है, पहले उसका मुंह थुरते है, जहां होता है विषैला दांत। और चाहते है पक...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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