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शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

अन्तराल

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अन्तराल.. दर्द और हंसी के बीच.. जो जुड़ा था उसके टूटने से पहले, होता है एक अन्तराल। टूटना नये का आगमन है.. पूष की रा...
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सोमवार, 31 अक्टूबर 2011

छठ का नजारा

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खरना का प्रसाद बनाती मां तेतारपुर गांव स्थित मालती पोखर का सुर्य मंदिर- जिसें एक महिला के द्वारा स्थापित किया गया एवं त...
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बुधवार, 19 अक्टूबर 2011

खुबसूरत मकड़ी

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खुबसूरत मकड़ी की यह तस्वीर अपने गांव के बगीचे से खींची है। इस मकड़ी का आकार 9 इंच है और इसके जाले की आकार लगभग तीन फी...
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मंगलवार, 11 अक्टूबर 2011

पानी रे पानी तेरा रंग कैसा?

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शेखपुरा जिले का घाटकोसुम्भ प्रखंड के तीन दर्जन से अधिक गांव कई माह तक पानी में डूबा रहता है और इसमें भी जिंदगी सूरज की किरणों की सुनहली प...
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शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2011

कालकंट

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बचपन से बुढ़ापे तक, गांव की गलियों से महानगरों की अट्टालिकाओं तक, जीवन के आदि से अंत तक.. रोज-रोज क्षण-क्षण विषवमन...
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रविवार, 2 अक्टूबर 2011

शब्दों की चुहलबाजी (क्षणिकाऐं)

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1 गांधी जी से लेकर इबादत की टोपी तक, सबकुछ बांट देगें। राजनीति के चतुरसुजान, खून को भी सेकुलर कह छांट देगें! 2 मेरी आदतों का व...
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मंगलवार, 13 सितंबर 2011

दोस्ती.

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कभी कभी मैं भी झेंप जाता हूं, जब, मित्र के पत्तल से उठा कर मिठाई अपने पत्तल में डाल लेता हूं और लोग चौक कर अचरज से  मेरी ओर...
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रविवार, 14 अगस्त 2011

अन्ना तुम संधर्ष करो हम तुम्हारे साथ है। कस्बाई इलाकों मे गुंजी अन्ना की आवाज।

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शेखपुरा अन्ना ने 16 अगस्त से शुरू होने वाले अनशन को देश की दूसरी आजादी का नाम दिया है और इसी दूसरी आजादी में अन्ना के साथ देने का शंखनाद क...
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यह है दर्द में डूबी हुई हंसी।

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यह तस्वीर मैंने अपने गांव के मुहसर टोली से खींची है, इस बच्चे को देख कर बरबस ही मुंह से निकल गया... मैंने भी माथे पर लगाया है तिरंगा, ...
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मंगलवार, 2 अगस्त 2011

इवादत के फूल

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मैंने तो फूल लाए थे इबादत के लिए उसको भी लहू में डुबो गया कोई... पैगामे मोहब्बत की हवा आज भी चलती तो है रास्ते में...
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गुरुवार, 28 जुलाई 2011

जब भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा तब क्या बचेगा?

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एक मित्र ने फेसबुक पर लिखा जब भ्रष्टाचार खत्म हो जाएगा तब क्या बचेगा? और मैने जबाब दिया. तब रहेगी- गरीब-गुरबों की खुशी दबे-कुचलों की हंसी ...
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बुधवार, 27 जुलाई 2011

अब कहां वो बात ?

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कितना शकून था  जब दो-एक कमरे का घर था  और थी एक मुठ्ठी   अपनी खुशी   अपना गम   अपनों का रूठना-रिझाना..   उसी छप्पर के नीचे   लड़ते झग...
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मंगलवार, 12 जुलाई 2011

जलती जिंदगी

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ठीक सूरज के छुपने से पहले हाथ में लग्गी ले, आया एक सौतार का बेटा महुआ की दूर भागती टहनियों से कहा ‘‘तुम मेरी भूख से ज्यादा दूर नहीं भाग ...
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सोमवार, 27 जून 2011

जी रहे है हम मुर्दों की तरह....

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जी रहे है हम मुर्दों की तरह.... मरा हुआ सांप देख हिम्मत वढ़ जाती है, पहले उसका मुंह थुरते है, जहां होता है विषैला दांत। और चाहते है पक...
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शुक्रवार, 17 जून 2011

गांधी जी के तीन बंदर

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अब तो सत्याग्रह भी जुर्म हो गया है देश में? राजगद्दी पर राजा बैठा है बंदर के भेष में.। मंत्री से संत्री तक सब बोले हिटलरवाणी, बाबा और सं...
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शुक्रवार, 3 जून 2011

जीवन की रेल....

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अहले सुबह अलसाये जब यात्री  अपने वर्थ से नीचे उतरे तो बिखड़ी गंदगी को देख नाक मुंह  सिंकोड़ने लगे.. गंदा तो सभी ने किया पर साफ कौन करेग...
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बुधवार, 25 मई 2011

आतंकियों के नाम आमंत्रण।

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आईएसआई ने रची साजिश हेडली के इस बयान को  अखबारों ने प्रमुखता से खबर लगाया साथ ही कसाब की सुरक्षा पर 10 करोड़ का किस्सा भी बॉक्स में च...
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सोमवार, 23 मई 2011

मां का नाम क्या है?

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बचपन से ही मां को लोग पुकारते आ रहे हैं ‘‘रमचनदरपुरवली’’ या सहदेवा के ‘‘कन्याय’’ बाबूजी जी भी पुकारते बबलुआ के ‘‘माय...
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बुधवार, 18 मई 2011

गुनहगार-(गजल)

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यह दुनिया क्या, इसके सितम क्या, जितने दुनियादार होगे, उतने सितम का एहसास होगा। पल भर में जहां बात बदल जाती है, ऐसी दुनिया में, है कौन ...
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सोमवार, 16 मई 2011

अपनी अपनी सुबह

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सुबह सबका अपना अपना होता है  और उसका सुख भी तभी, सूरज उगने से पहले रोप देते है सभी अपनी अपनी खुशी।   मैया की सुबह   सीता-राम के साथ होती है...
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रविवार, 8 मई 2011

बुढ़ा बरगद

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बुढ़े बरगद के नीचे उस रात जब मैं तुम्हारी आगोश में था  सर्दी की वह रात बहुत गर्म थी।  तुम्हारे इन्कार में छुपे इकरार को  मैंने समझा  तु...
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बुधवार, 4 मई 2011

मेरे महबूब

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मिजाजे महबूब को न जान पाया मैंने। उनकी खुशी में खुशी, उदासी में मातम मनाया मैंने।।  महबूब के दामन में हो फूलों की महक। चमन के खार को अप...
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गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

अन्नागिरी

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जब अन्ना ने लिया संकल्प लोकतंत्र को बचाने का जन लोकपाल लाने का और भ्रष्टाचार मिटाने का तब पूरा देश अन्ना के साथ खड़ा हो गया। किसी ने कहा ...
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अन्नागिरी

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अन्नागिरी जब अन्ना ने लिया संकल्प लोकतंत्र को बचाने का जन लोकपाल लाने का और भ्रष्टाचार मिटाने का तब पूरा देश अन्ना के साथ खड़ा हो...
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गुरुवार, 31 मार्च 2011

मैंने अप्रेल फूल मनाया।

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मैंने अप्रेल  फूल मनाया। हत्या का ब्रेकिग न्यूज चलबाया रिपोर्टरों को खूब हड़काया किसी को अस्पताल  तो किसी को थाने बुलबाया। मैंने अप्रेल...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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