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सोमवार, 27 जून 2011

जी रहे है हम मुर्दों की तरह....

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जी रहे है हम मुर्दों की तरह.... मरा हुआ सांप देख हिम्मत वढ़ जाती है, पहले उसका मुंह थुरते है, जहां होता है विषैला दांत। और चाहते है पक...
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शुक्रवार, 17 जून 2011

गांधी जी के तीन बंदर

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अब तो सत्याग्रह भी जुर्म हो गया है देश में? राजगद्दी पर राजा बैठा है बंदर के भेष में.। मंत्री से संत्री तक सब बोले हिटलरवाणी, बाबा और सं...
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शुक्रवार, 3 जून 2011

जीवन की रेल....

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अहले सुबह अलसाये जब यात्री  अपने वर्थ से नीचे उतरे तो बिखड़ी गंदगी को देख नाक मुंह  सिंकोड़ने लगे.. गंदा तो सभी ने किया पर साफ कौन करेग...
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बुधवार, 25 मई 2011

आतंकियों के नाम आमंत्रण।

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आईएसआई ने रची साजिश हेडली के इस बयान को  अखबारों ने प्रमुखता से खबर लगाया साथ ही कसाब की सुरक्षा पर 10 करोड़ का किस्सा भी बॉक्स में च...
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सोमवार, 23 मई 2011

मां का नाम क्या है?

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बचपन से ही मां को लोग पुकारते आ रहे हैं ‘‘रमचनदरपुरवली’’ या सहदेवा के ‘‘कन्याय’’ बाबूजी जी भी पुकारते बबलुआ के ‘‘माय...
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बुधवार, 18 मई 2011

गुनहगार-(गजल)

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यह दुनिया क्या, इसके सितम क्या, जितने दुनियादार होगे, उतने सितम का एहसास होगा। पल भर में जहां बात बदल जाती है, ऐसी दुनिया में, है कौन ...
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सोमवार, 16 मई 2011

अपनी अपनी सुबह

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सुबह सबका अपना अपना होता है  और उसका सुख भी तभी, सूरज उगने से पहले रोप देते है सभी अपनी अपनी खुशी।   मैया की सुबह   सीता-राम के साथ होती है...
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रविवार, 8 मई 2011

बुढ़ा बरगद

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बुढ़े बरगद के नीचे उस रात जब मैं तुम्हारी आगोश में था  सर्दी की वह रात बहुत गर्म थी।  तुम्हारे इन्कार में छुपे इकरार को  मैंने समझा  तु...
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बुधवार, 4 मई 2011

मेरे महबूब

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मिजाजे महबूब को न जान पाया मैंने। उनकी खुशी में खुशी, उदासी में मातम मनाया मैंने।।  महबूब के दामन में हो फूलों की महक। चमन के खार को अप...
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गुरुवार, 14 अप्रैल 2011

अन्नागिरी

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जब अन्ना ने लिया संकल्प लोकतंत्र को बचाने का जन लोकपाल लाने का और भ्रष्टाचार मिटाने का तब पूरा देश अन्ना के साथ खड़ा हो गया। किसी ने कहा ...
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अन्नागिरी

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अन्नागिरी जब अन्ना ने लिया संकल्प लोकतंत्र को बचाने का जन लोकपाल लाने का और भ्रष्टाचार मिटाने का तब पूरा देश अन्ना के साथ खड़ा हो...
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गुरुवार, 31 मार्च 2011

मैंने अप्रेल फूल मनाया।

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मैंने अप्रेल  फूल मनाया। हत्या का ब्रेकिग न्यूज चलबाया रिपोर्टरों को खूब हड़काया किसी को अस्पताल  तो किसी को थाने बुलबाया। मैंने अप्रेल...
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रविवार, 27 मार्च 2011

भोज और कुत्ते।

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फेंके गए जूठे पत्तलों को लेकर,  मचा था घमाशान। कई थे, जो अपनी भूख के लिए कभी भौंक  तो कभी झप्पट रहे थे एक दूसरे पर। काफी शोर-शराबा था। जो...
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शनिवार, 26 मार्च 2011

पोंटिंग की बीबी

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भारत से हारने के बाद आस्टेलिया के कप्तान  रिकी पोंटिंग जब घर आया। मूड खराब है, गर्मा गरम चाय पीलाओं , बीबी से फरमाया। बीबी ने तुरंत ...
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बुधवार, 23 मार्च 2011

सोंचों ? ------23 मार्च शहादत दिवस पर शहीदों को नमन करती मेरी रचना। एक श्रद्धांजली।

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सोंचो  सरफरोशी की तमन्ना अब किसके दिल में है? कौन देखेगा  जोर कितना बाजुए कातिल में है? नेजे पर रख कर सर को अब कौन बुलंद करेगा? जिस देश...
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मंगलवार, 22 मार्च 2011

सावधान

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देखा मैंने विज्ञापन एक सलाह थी उसमें बहुत ही नेक। सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। समझ गया मैं बात एक, दुर्घटनाऐं क्यों होती अनेक। सरकार क...
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शनिवार, 19 मार्च 2011

बुरा न मानों होली है। -----मीडियाबाजों ने जब पी ली भंग ---

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मीडियाबाजों ने जब पी ली भंग तो हो  गई शुरू पोल खोलने की जंग। एक ने कहा  सबसे तेज है हम तो दूसरे ने कहा हां जी, शातीराने में। श्रीमान ने फ...
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बुधवार, 16 मार्च 2011

ब्लॉगरिया

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ब्लॉगिंग करने की बिमारी,  संक्रामक है बड़ी भारी। जिसको होता इसका इंफेक्शन, काम नहीं आता कोई इंजेक्शन। बड़ा खतरनाक है इसका संक्रमण, यार ...
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गुरुवार, 3 मार्च 2011

बरबीघा के पंचवदन स्थान मंदिर में लगे मेला मेरे कैमरे की नजर से....... यहां स्थापित पंचमुखी शिवलिंग प्रसिद्ध है...

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जलभिषेक की मारमारी  खिलौना बेचने की मजबूरी खिलौने बाली मॉडल.. जलेबी का मजा श्रृंगार की दुकान वृक्ष की पूजा अरे ये तो छूट ही...
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मंगलवार, 15 फ़रवरी 2011

Joke of the year by Digvijay Singh ...

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J oke of the year by Digvijay Singh ...  . . » Digvijay Singh advises BJP to follow Gandhi's footsteps not Godse's... » MY ----...
14 टिप्‍पणियां:

Joke of the year by Digvijay Singh ...

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J oke of the year by Digvijay Singh ...  . . » Digvijay Singh advises BJP to follow Gandhi's footsteps not Godse's... » MY ----...
सोमवार, 14 फ़रवरी 2011

अखबारों की हेडलाइन की कतरनी कविता

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संजीव कुमार की चुटीली कविता गॉधी शताब्दी का शुभारम्भ, दो व्यक्तियों ने जमकर लाठी चलाई।  मद्य निषेध दिवस धूम-धाम से मना, जहरीली शराब ...
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रविवार, 13 फ़रवरी 2011

हार्ट हॉस्पीटल।

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किस्सा कुछ समझ न पाया, एक होडिंग जब नजर में आया। पढ़कर कुछ मन घबराया, आगे पढ़ने को उकसाया। लिखा था.. नये वॉल्व लगाये, या पुराना वॉल्व र...
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सोमवार, 17 जनवरी 2011

डर है की तुम डर नहीं रहे हो

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नहीं नहीं वैसे समय में जब सब कर रहें हों उपक्रम तुम्हें चुप कराने का तुम चुप मत रहना,, नहीं नहीं वैसे समय में  जबकि सल्तनत के बादशाह द...
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रविवार, 9 जनवरी 2011

पाती प्रेम की

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तेरे सौन्दर्यबोध में मैंने बहुत से शब्द ढूंढे अपनी भावनाओं को  कोरे कागज पर बारंबार उकेरा... शब्द शर्मा जाते  हर बार...। फिर इस तरह...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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