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शनिवार, 21 अगस्त 2010

पाकिस्तान में पानी की तबाही.......

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शकून के पल.... गांव की एक दोपहर

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खेलते बच्चे........ मंदिर के पास अराम करती महिलए..... यगशाला में ताश खेलते मर्द.....
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शुक्रवार, 20 अगस्त 2010

नरेन्द्र मोदी को बिहार अवश्य आना चाहिए......

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नरेन्द्र मोदी के लिए सबसे पहले टुडे ग्रुप के संपादक प्रभु चावल की टिप्पणी को उदिृत करना चाहूंगा जिसके अनुसार नरेन्द्र मोदी से सभी नफरत करते ...
बुधवार, 18 अगस्त 2010

दुष्यंत कुमार - तीन गजल

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कहाँ तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए कहाँ तो तय था चिराग़ाँ हर एक घर के लिए कहाँ चिराग़ मयस्सर नहीं शहर के लिए यहाँ दरख़तों के साये में ध...
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रविवार, 1 अगस्त 2010

"If you are in trouble, if you need a hand, just call my number, because i'm your friend "

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" If you are in trouble, if you need a hand, just call my number, because i'm your friend  "  
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" If you are in trouble, if you need a hand, just call my number, because i'm your friend  "  
सोमवार, 31 मई 2010

चीरफाड़ पर विनोद जी का आलेख पढ़ने के बाद मेरी टिप्पणी'........पत्रकार अधोषित रूप से इस बात का पालन कर रहे कि सरकार के खिलाफ खबर नहीं लगेगी।

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आपने  जिस  बात की चर्चा की है उसमें बहुत सच्चाई है। और यहां बिहार मे रहकर मेरे जैस लोग रोज रोज इससे रूबरू हो रहे है। पत्रकार अधोषित रूप से इ...
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अन्तराल

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अन्तराल दर्द और हंसी के बीच... जो जुड़ा था  उसके टूटने से पहले... टूटना है नये का आगमन और बीच का अन्तराल पतझड़ जहां कलरव करते थे विहग आ...
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मंगलवार, 27 अप्रैल 2010

दहेज की आंच में जल रहा है समाज, मुंह मांगी कीमत पर बिक रहे दुल्हे।

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दहेज की आंच दिन व दिन बढ़ती ही जा रही है। आलम यह कि बेटियों की शादी के लिए जूते घिसने की बात आज भी चरितार्थ हो रही हैं। दहेज को लेकर बरतुहार...
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कि फिर आऐगी सुबह

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हर सुबह एक नई उम्मीद लाती है खब्बो से निकाल हमको  जगाती  है अब शाम  ढले  तो उदास मत होना उम्मीदों कों  सिरहाने  रखकर तुम चैन ...
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गुरुवार, 25 मार्च 2010

कहां हो भगवान

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वमुिश्कल अपने मालिक से आरजू-मिन्नत कर जुटा पाई अपने बच्चे के लिए  एक अदद कपड़ा। मेले में बच्चे की जिदद ने मां को बना दिया है निष्ठुर। बच्...
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शुक्रवार, 19 मार्च 2010

यह कोई कहानी नहीं, मैं अपना दर्द आपके साथ बांटना चाहता हूं बस....... प्रेम की अग्निपरीक्षा

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यह कोई कहानी नहीं, मैं अपना दर्द आपके साथ बांटना चाहता हूं बस....... प्रेम की अग्निपरीक्षा रीना के सिसकने की आवाज से मेरी आंख खुल गई और मैं...
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राम की हत्या

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पड़ी है राम की लाश नाभी में मारा गया ``बाण´´ हनुमान ने निभाई विभीषण की भूमिका बतलाया रावण को राम के अमृत कलश का राज बतलाया कि राम तभी...
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प्रियतम तुम हो ..............

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प्रियतम तुम हो सुबह का सूरज जिसकी आभा से खिलता रहै जीवन का फुल सावन की मादक बून्द जिसके स्पशZ से भींग जाता है अन्र्तमन। पुरबा ब...
बुधवार, 17 मार्च 2010

मैं आग लगाना चाहता हूं।

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मैं आग लगाना चाहता हूं। बिना तिली बिना पेट्रोल अपने पराये सबके अन्दर दबी आग को भड़काना चाहता हूं। मैं आग लगाना चाहता हूं। जाति-धर्म ...
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बुधवार, 10 मार्च 2010

मेरे देश में

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मेरे देश में पिज्जा एम्बुलेंस से पहले पहूंचती लूट के बाद पुलिस सजती मेरे देश में कार लोन पांच परसेंट पर एडुकेशन लोन बारह पर मिलती म...
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मंगलवार, 9 मार्च 2010

अब बैताल डाल डाल

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आज हर जगह पाये जाते है जिवित बैताल संवेदनहीन निष्प्राण और तािर्ककता से भरपूर आज घरों में भी टंगने पर टंगा रहता बैताल। दफ्तर में बाबूओ...
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बुधवार, 3 मार्च 2010

काला अंग्रेज

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यह लूट-खसोट भ्रष्टाचार हिंसा खून की होली यह विध्वंस अक्षम्य अपराध कितने बेलज्ज हो तुम परतन्त्रता तुमने झेली नहीं न इसलिए आजादी रास न...
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सोमवार, 22 फ़रवरी 2010

प्रजापति दक्ष।

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प्रजापति दक्ष। अहं घृणा हठ सामाजिक मर्यादा और खानदान इन मान्यताओं में आज भी ज़िन्दा है प्रजापति दक्ष। आज भी हो रहा है महायज्ञ, अय...
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शनिवार, 20 फ़रवरी 2010

क्षणिकाऐं

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क्षणिकाऐं 1 साक्षेदारी साक्षेदारी नहीं करने में समझदारी 2 मोहब्बत मोहब्बत बस मिल जाये सोहबत यही है आधुनिक मोहब्बत। 3 आधुनिक प...
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गुरुवार, 18 फ़रवरी 2010

सौतार (आदिवासी)

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मनरे की थापों पर थिरकती पांवो के साथ साथ थिरकती है जिन्दगी ठप ठप .... जिन्दगी मिलती है यहां अलग अन्दाज में इनके आंखों में नहीं पलते हैं...
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मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010

मैं कवि नहीं हूं।

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मैं कवि नहीं हूं। मेरे पास नहीं है सारगभिZत शब्दों का कोष मैं नहीं जानता व्याकरण की व्याख्या न ही मैं कर सकता समायोजन भाव और शब्द में...
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रविवार, 14 फ़रवरी 2010

परछाई

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परछाई कभी कभी अपनी परछाई से डर जाता हूं जब जेठ की दोपहर में जलने लगता है मन तब लगता है अपनी ही परछाई प्रेत बन कर मुझे लीलना चाहती है।...
शुक्रवार, 12 फ़रवरी 2010

पिता

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संघषोंZ के विभिन्न आयामों में कोई प्रेरित करता है चुनौतियों को स्वीकार करने के लिए चोट खा कर गिरे अस्तित्व को सम्भालाता है धीरे ...
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देह बेच देती तो कितना कमाती... (काव्य)

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यह रचना मैंने झाझा के आदिवासी ईलाके में कई दिन बिताने के बाद लिखी थी आपके लिए हाजिर है। रोज निकलती है यहां जिन्दगी पहाड़ों की ओट से, च...
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Arun sathi
साधारण आदमी। गांव में रहना-सहना। ब्लॉग से पूराना नाता। कुछ भी लिखते रहने की आदत। अपने बारे में बताने को कुछ खास नहीं। बिहार के शेखपुरा जिले के शेरपर गांव निवासी। मीडिया का प्यादा भी। बाकी सब ठीक है। बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय, जो दिल ढूंढा आपना, मुझसा बुरा न कोय...
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